केंद्रीय मंजूरी के बाद PI Industries इसे बाजार में उतारने जा रही है; धान, मिर्च, टमाटर और चने में तना छेदक और फली छेदक जैसे घातक कीटों पर होगा सीधा वार।
नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान और फसल सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। भारत में पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित पहला कीटनाशक अणु (मॉलिक्यूल) अब देश के किसानों के खेतों तक पहुंचने के लिए तैयार है। ‘पायोक्सैनिलिप्रोल’ (Pioxaniliprole) नामक इस नए कीटनाशक अणु को विनियामक मंजूरी मिल चुकी है और चालू रबी सीजन में इसके व्यावसायिक लॉन्च की पूरी तैयारी कर ली गई है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश की प्रमुख कृषि-रसायन कंपनी PI Industries इसे ‘पायोक्साज़ोन’ (Pioxazon) ब्रांड नाम से बाजार में पेश करेगी। यह उत्पाद 20 प्रतिशत w/v सस्पेंशन कंसंट्रेट (20% SC) फॉर्मूलेशन के रूप में उपलब्ध होगा। इसे धान, मिर्च, टमाटर और चने (देशी व काबुली दोनों) जैसी मुख्य फसलों में लगने वाले सबसे जिद्दी कीटों की रोकथाम के लिए अधिकृत मंजूरी दी गई है।

क्यों खास है यह स्वदेशी कीटनाशक खोज?
अब तक भारतीय बाजारों में बिकने वाले अधिकांश आधुनिक और पेटेंटेड कीटनाशक अणु विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा विकसित किए जाते थे, जिसके कारण किसानों को इनके लिए भारी कीमत चुकानी पड़ती थी। Pioxaniliprole भारत का ऐसा पहला नया कीटनाशक अणु है जिसका अनुसंधान और विकास पूरी तरह देश में हुआ है।
वैज्ञानिक रूप से यह अणु कीटों की मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को लक्षित कर उन्हें तुरंत निष्क्रिय कर देता है। फसल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय से एक ही तरह के रसायनों का उपयोग करने से कीटों में जो दवा-प्रतिरोधक क्षमता (रेजिस्टेंस) विकसित हो गई थी, यह नया अणु उस चक्र को तोड़ने में बेहद कारगर साबित होगा।
किन-किन फसलों और घातक कीटों पर मिली है मंजूरी?
इस नए रसायन को खाद्य फसलों और व्यावसायिक सब्जियों में लगने वाले लेपिडोप्टेरा वर्ग के कीटों (इल्लियों और सुंडियों) के खिलाफ व्यापक स्तर पर परखा गया है। केंद्रीय स्तर पर इसे चार प्रमुख फसलों के लिए मंजूरी मिली है:
- धान की फसल: धान में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले पीला तना छेदक (Yellow Stem Borer) और पत्ता लपेटक (Leaf Folder) कीटों पर यह सीधा असर करता है। इसके प्रयोग से बालियों में होने वाला ‘सफेद सिट्टा’ (White Earhead) रुकता है।
- चने की खेती (देशी व काबुली): चने की फसल में रबी के दौरान सबसे बड़ा संकट फली छेदक (Helicoverpa / Pod Borer) का होता है। यह दवा फली बनने की अवस्था में दानों को नुकसान से बचाती है।
- टमाटर की फसल: टमाटर में फल छेदक इल्ली (Fruit Borer) और नई घातक समस्या बन चुके फॉल आर्मीवर्म व तंबाकू इल्ली पर यह प्रभावशाली नियंत्रण देती है।
- मिर्च की खेती: मिर्च में लगने वाली विभिन्न प्रकार की इल्लियों, विशेषकर तंबाकू इल्ली (Spodoptera) और फल छेदक को रोककर गुणवत्तापूर्ण पैदावार सुनिश्चित करती है।
किसानों पर क्या होगा इसका सकारात्मक असर?
रबी सीजन में चना, टमाटर और मिर्च जैसी नकदी फसलों में कीटों का प्रकोप किसानों की कुल लागत का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले कीटनाशक छिड़काव में खींच लेता है।
- कम छिड़काव में बेहतर नियंत्रण: सस्पेंशन कंसंट्रेट (SC) फॉर्मूलेशन होने के कारण यह पौधों की पत्तियों पर अच्छी तरह चिपकता है और वर्षा या तेज ओस में भी जल्दी धुलता नहीं है। इससे बार-बार छिड़काव करने की आवश्यकता कम होगी।
- फसल की गुणवत्ता में सुधार: फली और फलों में छेद न होने से उपज का बाजार भाव बेहतर मिलेगा, जिससे किसानों की शुद्ध आय में इजाफा होगा।
- लागत में बचत: स्वदेशी निर्माण होने के कारण आयातित पेटेंटेड अणुओं की तुलना में इसके दाम किसानों के लिए अधिक किफायती होने की उम्मीद है।
प्रयोग करते समय किन सावधानियों का रखें ध्यान?
कीटनाशक का प्रयोग करते समय वैज्ञानिक नियमों और सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है:
- लेबल क्लेम जरूर पढ़ें: दवा की बोतल या पैकेट पर छपे आधिकारिक लेबल को ध्यान से पढ़ें। कंपनी द्वारा अनुशंसित प्रति एकड़ पानी की मात्रा और दवा की खुराक का ही इस्तेमाल करें।
- सुरक्षा साधन पहनें: कीटनाशक घोल बनाते और स्प्रे करते समय मास्क, दस्ताने और चश्मा अवश्य पहनें। हवा की विपरीत दिशा में कभी भी छिड़काव न करें।
- मधुमक्खी और मित्र कीटों का ध्यान: फूल आने की चरम अवस्था में दोपहर के समय छिड़काव से बचें, ताकि परागण करने वाले कीट सुरक्षित रहें।
- प्रतीक्षा अवधि (PHI): तुड़ाई से पहले तय की गई ‘वेटिंग पीरियड’ का पालन करें ताकि फलों में किसी प्रकार का रासायनिक अंश न रहे।