खीरा की खेती करे पुरे साल | Cucumber Ki Kheti

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खीरा की खेती | Cucumber Ki Kheti
खीरा की खेती | Cucumber Ki Kheti

Table of Contents

खीरा की खेती ( CUCUMBER CULTIVATION )

खीरा की खेती के बारे में जानकारी ( INFORMATION ABOUT CUCUMBER CULTIVATION )

उन्नतखेतीबाड़ी ब्लॉग पर किसान भाइयों आप सभी का एक बार पुनः स्वागत है। आज हम इस ब्लॉग में आपसे खीरा की खेती के बारे में चर्चा करेगे। जैसा कि सभी किसान भाई जानते हैं कि नकदी/जायद की फसलों की बुवाई का समय फरवरी महीने से शुरू होकर मार्च तक चलेगा।

खीरा का वानस्पतिक नाम कुकुमिस स्टीव्स ( Cucumis Sativus ) है। खीरा का कुल ( Family- Cucurbitaceae ) होता है | खीरा का मूल स्थान की बात करे तो भारत को खीरा का मूल स्थान माना जाता है। खीरा बेल की तरह लटकने वाला पौधा है जिसका प्रयोग आमतौर पर गर्मियों में सब्ज़ी के रूप में सारे भारत में किया जाता हैं। गर्मी के मौसम में खीरा का उपयोग करना बहुत अच्छा होता है क्योंकि खीरे में 96% पानी होता है। खीरा एक एम बी (मोलिब्डेनम) और विटामिन का बहुत अच्छा स्त्रोत है। बात करे खीरा की उत्पादन की तो यह एक अल्पकालीन समय में अच्छा परिणाम देने वाली फसल है। आइये जानते है खीरा की खेती , हाइब्रिड खीरा की खेती, देसी खीरा की खेती, खीरा की खेती का समय, हाइब्रिड खीरा का बीज, खीरा लगाने का सही समय, बरसाती खीरा की खेती, खीरा खाने के फायदे,खीरा की खेती कैसे करें और खीरा की खेती के बारे में जानकारी।

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आएये जानते है खीरा की खेती कैसे करे :

खीरा की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु ( SUITABLE CLIMATE FOR CUCUMBER CULTIVATION )

खीरा की खेती ( Cucumber Ki Kheti ) के उपयुक्त जलवायु की बात करे तो सर्वाधिक तापमान 40 डिग्री सेल्शियस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्शियस होना चाहिए| अच्छी बढ़वार, उत्पादन तथा फल-फूल के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्शियस तापमान अच्छा माना जाता है| जब अधिक वर्षा, आर्द्रता और बदली होने से कीटों व रोगों में वृद्धि होती है| नर फूल अधिक निकलने के लिए अधिक तापमान और प्रकाश होना चाहिए | वही मादा फूलों की संख्या अधिक होने के लिए इसके विपरीत मौसम होना चाहिए |

खीरा की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी ( SUTAIBLE SOIL FOR CUCUMBER CUTIVATION )

  • खीरा की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी (Sandy Loam Soil) में सबसे अच्छी मानी जाती है और साथ ही साथ इसका इस मिट्टी में खीरा का उत्पादन भी अधिक होता है | खीरा की खेती के लिए पीएच का मान 0 से 7.0 के बीच ही होना चाहिए |
  • कार्बनिक पदार्थों से भरपूर दोमट मिट्टी जिसमें पर्याप्त मात्रा में जल निकासी की व्यवस्था हो वो खीरे की खेती के लिए बेहतर और सबसे अच्छी होती है |
  • खीरा की खेती के लिए जलोढ़ मिट्टी ( Alluvium Soil ) भी उपयुक्त होती है |

खीरा लगाने का सही समय ( RIGHT TIME TO PLANT CUCUMBER )

  • खीरा लगाने का सही समय की बात करे तो ग्रीष्म में खीरा की खेती के लिए बुवाई फरवरी-मार्च में की जाती है |
  • वर्षा में खीरा की खेती या खीरा लगाने का  सही समय जून-जुलाई होती है |
  • पर्वतीय इलाको में खीरा की खेती के लिए बूवाई अप्रैल माह में की जाती है |

उन्नत किस्में ( IMPROVED VARIETIES )

खीरा की विदेशी किस्में

जापानी लौंग ग्रीन, चयन, स्ट्रेट- 8 और पोइनसेट आदि प्रमुख है|

खीरा की भारतीय किस्में

स्वर्ण अगेती, स्वर्ण पूर्णिमा, पूसा उदय, पूना खीरा, पंजाब सलेक्शन, पूसा संयोग, पूसा बरखा, खीरा 90, कल्यानपुर हरा खीरा, कल्यानपुर मध्यम और खीरा 75 आदि प्रमुख है|

खीरा की संकर किस्में

पंत संकर खीरा- 1, प्रिया, हाइब्रिड- 1 और हाइब्रिड- 2 आदि प्रमुख है|

खीरा की नवीनतम किस्में

पीसीयूएच- 1, पूसा उदय, स्वर्ण पूर्णा और स्वर्ण शीतल आदि प्रमुख है|

खीरा किस्मों की विशेषताएं और पैदावार ( CHARACTERISTICS AND YIELD OF CUCUMBER VARIETIES )

पंत संकर खीरा 1

यह खीरा की संकर किस्म होती है जोकि बुआई के लगभग 50 दिनों के बाद ही तुड़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं | इस किस्म के फल मध्यम आकार के 20 सेंटीमीटर लम्बे और रंग में हरे होते हैं| यह संकर किस्म मुख्य रूप से मैदानी भागों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में लगाने के लिए उपयुक्त होता है| सामान्य रूप से एक हेक्टेयर क्षेत्रफल से 300 से 350 क्विंटल का उत्पादन प्राप्त होती है|

स्वर्ण अगेती

यह खीरे की एक अगेती किस्म ( EARLY VARIETY ) है | ये किस्म की बुआई के 40 से 42 दिनों बाद ही इसकी प्रथम तुड़ाई की जा सकती है| स्वर्ण अगेती खीरा का फल मुख्यतः मध्यम आकार के, हल्के हरे सीधे तथा क्रिस्पी होते हैं| फरवरी से जून के महीने इस खीरा की बुआई की जा सकती है|इसमें  फलों की संख्या प्रति पौध लगभग 15 होती है | सामान्य रूप से पैदावार की बात करे तो एक हेक्टेयर क्षेत्रफल से 200 से 250 क्विंटल पैदावार प्राप्त होती है|

स्वर्ण पूर्णिमा

यह खीरा की किस्म मध्यम अवधि में तैयार होने वाली फसल है| इस किस्म की मुख्य विशेषता यह है कि इसके फल लम्बे, हल्के हरे, सीधे तथा ठोस होते हैं| बुआई के 45 से 47 के बाद ही फलों की तुड़ाई शुरू हो जाती है| फलों की तुड़ाई सामान्य रूप से 2 से 3 दिनों के अन्तराल पर करते रहना चाहिए और एक हेक्टेयर क्षेत्रफल से 200 से 225 क्विंटल पैदावार प्राप्त होती है|

पूसा संयोग

यह खीरा की हाइब्रिड किस्म है| इसकी मुख्य विशेषता फल 22 से 30 सेंटीमीटर लम्बे, बेलनाकार तथा हरे रंग के होते है| जिन पर पीले कांटे पाये जाते है और इसका गूदा कुरकुरा होता है| खीरा की यह किस्म 50 दिन में तैयार हो जाती है| इस किस्म की प्रति हेक्टेयर 200 क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है|

पूसा बरखा

यह किस्म खरीफ के मौसम के लिए विशेष रूप से तैयार की गई हैं| इसकी मुख्य विशेषता  यह है कि यह उच्च मात्रा वाली नमी, तापमान तथा पत्तों के धब्बे रोग को सहन करने वाली होती है| इस किस्म की औसत पैदावार की बात करे तो 300 से 375 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की होती है|

स्वर्ण शीतल

इस खीरे की किस्म की मुख्य विशेषता यह है कि इसके फल मध्यम आकार के हरे व ठोस होते है| चूर्णी फफूंदी और श्याम वर्ण के लिए यह प्रतिरोधी किस्म है| इस किस्म कि औसतन पैदावार प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल होती है|

स्वर्ण पूर्णा

इस किस्म के मध्यम आकार युक्त ठोस फल, चूर्णी फफूंदी के लिए सहन शील यह प्रति हेक्टेयर 300 से 350 क्विंटल पैदावार देती है|

पंजाब खीरा 1

ये खीरा की किस्म के फल हरे गहरे रंग के होते हैं| जो स्वाद कम कड़वा और इसका औसतन भार 125 ग्राम होता हैं| इसका औसतन लंबाई 13 से 15 सेंटीमीटर होती है| इसकी तुड़ाई सितंबर और जनवरी महीने में फसल बोने से 45 से 60 दिनों के बाद तक की जा सकती है| सितंबर महीने में बोयी फसल का औसतन पैदावार की बात करे तो यह 300 क्विंटल तथा वही जनवरी महीने में बोयी फसल की औसतन पैदावार 300 से 370 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है|

पंजाब नवीन

इस किस्म की विशेषता के पौधे के पत्तों का रंग गहरा हरा, फलों का आकार बराबर बेलनाकार तथा तल मुलायम और फीके हरे रंग का होता है| इसके फल कुरकुरे एवं कड़वेपन रहित और बीज रहित होते है| इसमें विटामिन सी की उच्च मात्रा पायी जाती है तथा सूखे पदार्थ की मात्रा भी ज्यादा होती है| यह किस्म 65 से 70 दिनों में पक जाती है| इसके फल स्वादिष्ट, रंग और रूप आकर्षित, आकार और बनावट बढिया होती है| इस किस्म की औसतन पैदावार 300 से 350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है|

जापानीज लौंग ग्रीन

यह खीरे की अगेती किस्म ( EARLY VARIETY ) है यह किस्म बुआई के 45 दिन में फल देना शुरू कर देती है| इस किस्म के फल 30 से 40 सेंटीमीटर लम्बे तथा हरे रंग के होते है तथा इसका गूदा हल्का हरा और कुरकुरा होता है|

पोइनसेट

इस खीरा की किस्म के फल आमतौर पर 20 से 25 सेंटीमीटर लम्बे होते है| इनके फल की रंग की बात करे तो यह गहरे हरे रंग के होते है| यह किस्म मुख्य रूप से मृदुरोमिल आसिता, चूर्णी फफूदी, श्यामवर्ण, कोणीय पत्ती धब्बा हेतु प्रतिरोधी किस्म है|

स्ट्रेट 8

यह खीरे की अगेती किस्म ( EARLY VARIETY )  है| इस किस्म के फल 25 से 30 सेंटीमीटर लम्बे, मोटो, सीधे, बेलनाकार तथा हरे रंग के होते है|

पूसा उदय

इस किस्म के फल हल्के हरे रंग का होता है | इस किस्म के फल 13 से 15 सेंटीमीटर लम्बे व चिकने होते है|खीरा की इस किस्म को बंसत ग्रीष्म और वर्षा ऋतु दोनो में उगाया कर लाभ कमाया जा सकता है|यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था द्वारा विकशित की गई है |

चयन

यह खीरे की अधिक उपज देने वाली और मध्यम पछेती ( MODERATE REGRETS ) कठोर किस्म है| इस किस्म के फल 50 सेंटीमीटर लम्बे , सीधे और बेलनाकार होते है तथा इसका छिलका हरे रंग का होता है| जिस पर सफ़ेद कांटे होते है और साथ ही साथ इसका गुदा सफ़ेद एवं कुरकुरा होता है|

खीरा की खेती के लिए खेत की तैयारी कैसें करें ( HOW TO PREPARE THE FIELD FOR CUCUMBER CULTIVATION )

  • खीरा की खेती के लिए खेत की कोई खास तैयारी करने की आवश्यकता नही पड़ती है। क्योंकि खीरा की किस्मो के आधार पर ही खेत की तैयारी की जाती है।
  • अगर बलुई भूमि है तो उसके लिए अधिक जुताई की आवश्यकता नहीं होती। आमतौर पर 2से 3 जुताई से ही खेत तैयार हो जाता है। जुताई के तुरंत बाद ही  खेत में पाटा लगाकर क्यारियां बना लेनी चाहिए।
  • अगर भारी-भूमि है तो उसके तैयारी के लिये अधिक जुताई की आवश्यकता पड़ती है।
  • सामान्य रूप से बगीचों के लिये भी यह फसल उपयोगी है, जिसका आप आसानी से बुआई की कर सकते है।
  • खेत को पर्याप्त मात्रा में समृद्ध करने के लिए गोबर की खाद ( COW DUNG MANURE ) को मिलाया जाता है क्योंकि गोबर की खाद मुख्यतः मृदा जनित रोगों के नियंत्रण में सहायक होता है |

खीरा की खेती के लिए बीज की मात्रा (SEED QUANTITY FOR CUCUMBER CULTIVATION )

  • खीरा की खेती के लिए बीज की मात्रा सामान्य रूप से मौसम के आधार पर निर्धारित की जाती है । जायद में खीरा की फसलो के लिये शुद्ध बीज की मात्रा 3-4 किलो/ हैक्टर तथा खरीफ की फसल के लिये 6-7 कि.ग्रा./हैक्टर की दर से बीज की आवश्यकता होती है ।
  • ग्रीष्म ऋतु में खीरा की फसल के लिये अधिक बीज की जरूरत होती है | जिसका मुख्य कारण तापमान व मौसम है जिससे की बीज का अंकुरण शत-प्रतिशत नहीं हो पाता है । बीज की मात्रा 20-25 ग्रा./8-10 वर्ग मी. के लिये पर्याप्त होते हैं ।

खीरा की खेती के लिए बीज का उपचार ( SEED TRATMENT FOR CUCUMBER CULTIVATION )

खीरा की खेती ( Cucumber Ki Kheti ) के लिए बिजाई से पहले, फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए , उत्पादन बढ़ाने के लिए और साथ ही साथ जीवनकाल बढ़ाने के लिए, अनुकूल रासायनिक के साथ उपचार करना चाहिए | बिजाई से ठीक पहले बीजों को 2 ग्राम कप्तान के साथ उपचार करें |

 खीरा की खेती के लिए बिजाई का तरीका ( SOWING METHOD FOR CUCUMBER CULTIVATION )

  • बीज को ढाई मीटर की चौड़ी बेड पर दो-दो फुट के फासले पर लाइन में बोया जा सकता है।
  • खीरे मुख्य रूप से फैलने वाले होते है जिससे की बिजाई अगर उठी हुई मेढ़ो के ऊपर करेगे तो ज्यादा अच्छा हैं। जिसमे मेढ़ से मेढ़ की दूरी 1 से 1.5 मीटर और पौधे से पौधे की दुरी 60 सें.मी. रखते हैं।
  • खीरा की बिजाई करते समय महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि एक जगह पर कम से कम दो बीज लगाएं।

खीरा की खेती के लिए बीज की गहराई ( SEED DEPTH FOR CUCUMBER CULTIVATION  )

बीज को 2-3 सैं.मी. गहराई पर अंकुरण अच्छा होता है|

खीरा की खेती के लिए बिजाई का ढंग ( SOWING METHOD FOR CUCUMBER CULTIVATION )

छोटी सुरंगी विधि ( SHORT TUNNEL METHOD )

खीरा की खेती ( Cucumber Ki Kheti ) के लिए इस विधि का प्रयोग जल्दी पैदावार लेने के लिए किया जाता है| यह विधि मुख्य रूप से फसल को दिसंबर और जनवरी की ठंड से बचाती है|इस विधि में खीरा को दिसंबर के महीने में 2.5 मीटर चौड़े बैडों पर बीज की बोवाई की जाती है| इसमें खीरा के बीजों को बैड के दोनों तरफ 45 सैं.मी. के फासले पर बोयें| बिजाई से पहले 45-60 सैं.मी. लम्बे और सहायक डंडों को मिट्टी में अच्छे से गाढ़े| खेत को प्लास्टिक की शीट (100 गेज़ मोटाई वाली) को डंडों की सहायता से अच्छी तरह से ढक दें| फरवरी महीने में तापमान सही होने पर पुनः प्लास्टिक शीट को हटा दें|

गड्ढे खोद कर बिजाई करना ( SOWING BY DIGGING A PIT )

 कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बरसाती खीरा की खेती के लिए 1.5 मीटर की दूरी पर गड्ढे खोद कर सड़ी गोबर खाद को मिला दें।

खालियां बनाकर बिजाई करना ( SOWING BY MAKING BLANKS )

खीरा में मुख्यतः ट्रैक्टर मेंड़ बनाने वाली मशीन की मदद से मेंड़ और खालियां बनाएं और इन मेड़ और खालियों में बिजाई करे ।

गोलाकार गड्ढे खोद कर बिजाई करना (SOWING BY DIGGING A CIRCULAR PIT  )

गोलाकार गड्ढे खोद कर बिजाई मुख्य रूप से मशीन के माध्यम से गड्ढे खोदकर उसमे उर्वरक डाल देते है और इसमें फसल की पैदावार अधिक होती है पानी लगते समय एक गड्ढे को दुसरे से जोड़ देते है |

नोट-

आमतौर पर खीरा की खेती एरिया और किसान की कृषि व्यवस्था अनुसार की जाती है और ऊपर दिए गए बुवाई की विधि में सभी का अपना महत्त्व है | लेकिन ज्यादातर किसान भाई छोटी सुरंग विधि द्वारा ही खीरा की बूवाई करते है |

खीरा की खेती के लिए खाद तथा उर्वरक की मात्रा  ( AMOUNT OF MANURE AND FERTILIZER FOR CUCUMBER CULTIVATION )

  • खीरा की खेती में अच्छी फसल उत्पादन के लिए खेत की तैयारी करते समय ही 6 टन गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद खेत में जुताई के समय में मिला दें।
  • खीरा में 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 12 किलोग्राम फास्फोरस व 10 किलोग्राम पोटाश की मात्रा पर्याप्त रहती है।
  • खेत में बिजाई के समय ही 1/3 नाइट्रोजन, फास्फोरस की पूरी मात्रा तथा पोटाश की पूरी मात्रा खेत में डाल दे।
  • शेष बची हुई  नाइट्रोजन की मात्रा को दो बार में डालना चाहिए पहला बिजाई के एक महीने बाद व दूसरा फूल आने पर खेत की नालियों में डाल कर मिट्टी चढ़ा दें।

खीरा की खेती के लिए खेत की सिंचाई ( FARM IRRIGATION FOR CUCUMBER CULTIVATION )

  • खीरा की फसल के लिए अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है | खीरा के पौधों को केवल तीन से चार सिंचाई की आवश्यकता होती है |
  • ग्रीष्म ऋतु में इसके पौधों को 10 से 15 दिन के अंतराल में पानी की आवश्यकता होती है |
  • बारिश के मौसम में इसके पौधों की सिंचाई जरूरत पड़ने पर ही पानी देना चाहिए तथा सर्दियों के मौसम में खीरा को हफ्ते में एक बार पानी देना होता है |
  • खीरे की फसल के सिंचाई के लिए ड्रिप विधि का इस्तेमाल बहुत अच्छा माना जाता है |

खीरा की खेती के लिए खरपतवार नियन्त्रण ( WEED CONTROL FOR CUCUMBER CULTIVATION )

खीरा की फसल की अच्छी पैदावार लेने की लिए खेत में खरपतवारो का नियंत्रण करना बेहद जरुरी होता  है । जिसके लिए बरसात में सामान्य रूप से  3 – 4 बार खेत की निराई – गुड़ाई करनी चाहिए ।

खीरा की खेती के लिए फल की तुड़ाई  ( FRUIT PICKING FOR CUCUMBER CULTIVATION  )

खीरा के बीज बुवाई के ठिक 2 महीने  के बाद ही फसल तैयार हो जाता है और फसल के तैयार हो जाने पर उसके 2 महिने तक हर 3 से 4 दिन के अन्तराल में फलो की तुड़ाई कर लेनी चाहिए |

खीरे का पैदावार ( YIELD )

खीरा की जायद की फसल की उत्पादन की सही देखभाल के बाद 100 -120 क्विंटल प्रति हैक्टर प्राप्त होती है । जबकि इसकी तुलना में खरीफ की फसल की पैदावार अधिक होती है । इस प्रकार से खरीफ की फसल की पैदावार औसतन 14-16 क्विंटल प्रति हैक्टर की दर से प्राप्त होती है । बगीचों से भी समय-समय पर फल मिलते रहते हैं । इस प्रकार से 15-20 कि.ग्रा. प्रति वर्ग मी. क्षेत्र से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है |

हाइब्रिड खीरा की खेती ( HYBRID CUCUMBE CULTIVATION )

हाइब्रिड एग्रीकल्चर को सब्जियों की अच्छी पैदावार और गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए मुख्य रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। हाइब्रिड खेती से मुख्य तौर पर जिले के उन छोटे-छोटे किसानों को लाभ पहुचाया जा सकता है जो कि महंगे हाइब्रिड बीज, खाद और दवा नहीं खरीद सकते हैं। परंपरागत खेती की तुलना में हाइब्रिड खेती से 3 गुना ज्यादा सब्जियों की पैदावार में अच्छा मुनाफा होता है। जिसकी वजह से बाजार में इसके मूल्य भी अच्छे मिलते है |

हाइब्रिड खीरा की खेती से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को विशेष रूप से अपने क्षेत्र की प्रचलित और अधिकतम उत्पादन करने वाली किस्मों का चयन करना बेहद जरूरी है क्योंकि सभी जानते है खीरे को अधिकतर व्यवसायिक खेती के तौर पर उगाया जाता है|  बात करे हमारे देश में खीरे की खेती की तो यह जायद और खरीफ दोनों ऋतुओं में की जाती है| जबकि ग्रीन हाउस में खीरा की खेती लगभग पुरे वर्ष की जाती है | इससे पता चलता है कि खीरा एक बहुत ही महत्वपूर्ण फसल है और इसकी मांग बाजार में निरंतर बनी रहती है|

इसलिय किसान भईयो को खीरा की अधिकतम उत्पादन देने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए ताकि अधिक से अधिक  मुनाफा प्राप्त किया जा सके|  बात करे हमारे देश की तो खीरे की उन्नत और संकर किस्मों के साथ ही साथ कुछ विदेशी किस्मों को भी अच्छी उत्पादन के लिए उगाया जाता है| हाइब्रिड खीरा की खेती के लिये उनकी कुछ किस्मे इस प्रकार है –

  • पंजाब सलेक्शन
  • पूसा संयोग
  • विनायक हाइब्रिड
  • कल्यानपुर हरा खीरा
  • कल्यानपुर मध्यम
  • हाइब्रिड लाइट ग्रीन
  • हाइब्रिड वाईट ग्रीन
  • स्वर्ण अगेती
  • स्वर्ण पूर्णिमा
  • पूसा उदय
  • पूना खीरा
  • पूसा बरखा
  • खीरा 90
  • खीरा 75

बरसाती खीरा की खेती (  RAINY CUCUMBER CULTIVATION )

खीरा की खेती की बात करे तो यह गर्मी के मौसम में की जाती है। खीरा की फसल चक्र सामान्य रूप से 60 से 80 दिन में पूरा होती है | अगर हम बात करे बरसाती खीरा की खेती की तो यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा की बरसात के मौसम में खीरा की फसल की उत्पादन ज्यादातर अच्छी होती है। बरसात खीरा की बुवाई को हर जगह पर अलग-अलग समय में होता है। उत्तरी भारत की बात करे तो यहाँ खीरा की बुवाई विशेष रूप से फरवरी-मार्च व जून-जुलाई में की जाती है और वही अगर पर्वतीय क्षेत्रों की बात करें तो यहां मुख्यतः बुवाई मार्च-जून तक की जाती है।

खीरा के पौधों में लगने वाले रोग या खीरा के रोग एवं उनकी रोकथाम ( CUCUMBER PLANT DISEASES AND THEIR PREVENTION )

खीरा में लगाने वाला विषाणु रोग ( VIRAL DISEASE )

  • खीरे में विषाणु रोग बहुत ही आम रोग होता है, ये पौधों के पत्तियों से शुरू होती है |  इसका सीधा  प्रभाव फलो पर पड़ता है |
  • इस रोग में मुख्य रूप से पत्तियों पर पीले धब्बो का निशान पड़ जाता है और साथ ही साथ धीरे-धीरे पत्तियां सिकुड़ने लगती है | इस बीमारी का प्रभाव खीरा की फलो पर भी पड़ता है फले छोटी और आकार में टेडी मेडी हो जाती है |

खीरा में लगाने वाला विषाणु रोग का प्रबंधन ( MANAGEMENT )

विषाणु जनित रोग को नीम का काढ़ा या गौमूत्र में माइक्रो झाइम को मिला कर इसे 250 ml प्रति pump फसलो पर छिडकाव करने से दूर किया जा सकता है |

खीरा में लगाने वाला एन्थ्रेक्नोज रोग  या खीरा में लगाने वाला फल गलन  रोग ( ANTHRACNOSE OR FRUIT ROT )

यह रोग का मुख्य लक्षण पौधों के पत्तियों, तने एवं फलों पर दिखाई देते हैं। इस रोग से खीरा की पौधे की पत्तों पर पीले रंग के धब्बे और फलों के ऊपर अण्डाकार धब्बे निर्मित होते है| अत्यधिक नमी के कारण ही  इन धब्बों का निर्माण होता है और साथ ही साथ इन धब्बों से गुलाबी चिपचिपा पदार्थ निकलता है।

प्रबंधन ( MANAGEMENT )

  • इस रोग की रोकथाम के लिए मुख्य रूप से  मैनकोज़ेब 75% WP ( WETTABLE POWDER ) @ 500 ग्राम/एकड़ या क्लोरोथालोनिल 75% WP @ 300 ग्राम/एकड़ या हेक्साकोनाज़ोल 5% SC ( SUSPENSION CONCENTRATE ) 300 ग्राम/एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में मिलकर छिड़काव कर देना चाहिए |
  • खीरा की बीज को कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम दवा प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करके बोना चाहिए |
  • अगर खेत में रोग लक्षण शुरू हो गया है तो कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल 10 दिन के अंतराल पर छिड़क देना चाहिए |
  • फसल अवशेष को जला देना चाहिए |

खीरा में लगाने वाला मृदुल आसिता रोग ( DOWNY MILDEW )

यह रोग आमतौर पर खीरा, परवल, खरबूज और करेला पर पाया जाता है | उत्तरी भारत में खीरा के फसल में इस रोग का प्रकोप अधिक होता है | यह रोग वर्षा ऋतु के अंतराल में जब तापमान 20-22 डिग्री सेंटी होता है तब यह रोग तेजी से फैलता है | इस रोग में खीरा की पत्तियों पर कोणीय धब्बे बनते हैं | ये पत्ती के ऊपरी सतह पर पीले रंग के होते हैं | अधिक आर्द्रता की उपस्थिति में पत्ती की निचली सतह पर मृदोमिल कवक की वृद्धि समान्य रूप से दिखाई देती है |

प्रबंधन ( MANAGEMENT )

  • बीजों को मेटालेक्जिल नामक कवकनाशी से 3 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करने के बाद ही बोना चाहिए |
  • मैंकोजेब 0.25 प्रतिशत (2.5 ग्राम/लीटर पानी) घोल का छिड़काव करना चाहिए  |
  • मृदुल आसिता रोग से पूरी तरह ग्रस्त लताओं को बहुत सावधानी पूर्वक निकाल कर जला देना चाहिए |

म्लानि एवं जड़ विगलन रोग ( WILTING AND ROOT ROT )

यह रोग आमतौर पर  खीरा व खरबूज में पाया जाता है | इसमे बीज पत्र सड़ने लगता है और बीज पत्र व नए पत्ते हल्के पीले होकर मरने लगते हैं | जो भी रोग ग्रसित पत्तियां होती है वो और साथ ही साथ पूरा का पूरा पौधा मुरझा जाता है | नई पौधे का तना अंदर की तरफ भूरा रंग होकर सड़ने लगता है | पौधे की जड़ भी पूरी तरह से सड़ जाती हैं |

प्रबंधन  ( MANAGEMENT )

  • खेत की गर्मी में जुताई करें और साथ ही खाद का प्रयोग करें | ट्राइकोडर्मा 3-5 कि. ग्रा./हे की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर खेत में प्रयोग करना चाहिए |
  • बीज को कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करके ही बोना चाहिए |
  • इसमें मुख्यतः धान एवं मक्का के साथ 4 साल तक का फसल-चक्र अपनाना चाहिए |

खीरा में लगाने वाला चूर्णिल आसिता रोग या खीरा में लगाने वाला भभूतिया रोग ( Powdery Mildew)

यह रोग मुख्यतः ऐरीसाइफी सिकोरेसिएरम नाम के एक फफूंदी के कारण होता है | इस रोग में सबसे पहले पत्तियों के ऊपरी भाग पर सफ़ेद-धूसर धब्बे दिखाई देते है जो की बाद में बढ़कर सफ़ेद रंग के पाउडर में बदल जाते हैं। जो भी संक्रमित भाग होता है वह पूरी तरह से सूख जाता है और सभी पत्तियां गिर जाती है।

प्रबंधन ( MANAGEMENT )

  • हेक्ज़ाकोनाजोल 5% SC 400 मिली या थियोफेनेट मिथाइल 70% WP या एज़ोक्सिस्ट्रोबिन 23 SC का 200 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए ।
  • इसमें मुख्य रूप से रोग ग्रस्त फसल के अवशेष इकट्ठा करके खेत में जला देना चाहिए |
  • फफूंदीनाशक दवा जैसे कैराथेन या कैलिक्सीन आधा मि.ली. दवा एक लीटर पानी में घोल बनाकर 7-10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए |
  • इस दवा के उपलब्ध न होने पर आप प्रोपीकोनाजोल 1 मि.ली. दवा 4 लीटर पानी में घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव कर सकते है |

खीरा मोजैक वायरस ( CUCUMBER MOSAIC VIRUS )

यह रोग का लक्षण विशेषकर नई पत्तियों में चितकबरापन और सिकुड़न के रूप में दिखाई देता है | इसमें पत्तियां छोटी हरी-पीली हो जाती हैं और  साथ ही साथ उनकी वृद्धि भी रूक जाती है | इसके प्रकोप से पत्तियां छोटी होने के साथ ही साथ इनका पुष्प छोटी पत्तियों में बदले हुए दिखाई पड़ते हैं | इतना ही नहीं इनके कुछ पुष्प गुच्छों में बदल जाते हैं | रोग ग्रसित पौधा बौना रह जाता है और उसमें उत्पादन बिल्कुल नहीं होती है | इस तरह की समस्या लगभग सभी कद्दू वर्गीय सब्जियों में देखने को मिलता है |

प्रबंधन ( MANAGEMENT )

  • खेत में से रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर जला देना ही अच्छा उपाय है |
  • खेत के आस-पास से जंगली खीरा एवं इस कुल के अन्य खरपतवारों को निकल कर फैक देना चाहिए |
  • इसमें रोगरोधी किस्मों का चयन करना चाहिए |
  • रोग वाहक कीटों से बचाव करने के लए मुख्यतः  थायोमिथेक्साम 0.05 प्रतिशत (0.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल में 2-3 बार छिड़काव फल आने तक करें |

खीरा का कीट नियंत्रण ( INSECT CONTROL OF CUCUMBER)

एफिड ( APHIDS )

ये बहुत ही छोटे आकार के कीट होते हैं | ये किट पौधे के छोटे हिस्सों पर हमला करते है तथा पौधो से सारा रस चूस लेती है | इन कीटो की संख्या काफी तेजी से बढती है और ये Virus फ़ैलाने का काम करती है|  इन कीटो के कारण से पत्तियाँ पिली पड़ने लगती है |

प्रबंधन ( MANAGEMENT )

एंटोबैक्टीरिन खीरा पर एफिड्स के लिए एक बहुत प्रभावी उपाय है | इसे सामन्य रूप से  0.1 ग्राम प्रत्येक के ampoules में उत्पादित किया जाता है |  प्रसंस्करण के बाद, कीटों की एक उपनिवेश बीमार हो जाती है और यह  6-7 दिनों के बाद मर जाती है|

कद्दू का लाल भृंग ( RED PUMPKIN BEETLE )

यह कीट एक तेज चमकीला नारंगी रंग का छोटा किट होता है| इनका आकार की बात करे तो यह लगभग 7 मि.मि लंबा और 4.5 मि.मि चौड़ा होता है | इस कीट का भृंग ( BEETLE ) पीलापन लिए सफेद होता है | इस किट का सिर का रंग हल्का भूरा होता है | इस कीट के भृंग ( BEETLE ) और व्यस्क, दोनों ही नुकसान पहुंचाते हैं | इसका भृंग मुख्य रूप से जमीन के नीचे रहता है और पौधों की जड़ों एवं तनों में छेद कर देता है | इसके प्रौढ़ पौधों की छोटी पत्तियों को ज्यादा पसंद करते हैं और उन्हें खाते हैं | इस कीट का आक्रमण मुख्य रूप से फरवरी माह से लेकर अक्टूबर तक होता है | अंकुरण के बाद बीज पत्रक से लेकर 4-5 पत्ती अवस्था की खीरा के पौध को इस कीट से बहुत नुकसान होता है |

प्रबंधन ( MANAGEMENT )

  • कद्दू का लाल भृंग के इलाज के लिये गर्मी का मौसम सही समय होता है| इसके लिए खेत की गहरी जुताई करनी चाहिये जिससे इस कीट के अंडे व भृंग ऊपर आ जाए और तेज गर्मी व धुप से नष्ट हो जाए |
  • पहली अवस्था में जब इस किट का कम प्रकोप रहता है तभी वयस्क को हाथ से पकड़कर नष्ट कर देना चाहिए |
  • इसके लिए कार्बेरिल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए |

फल मक्खी ( FRUIT FLY  )

इस मक्खी का रंग मुख्यतः लाल-भूरा होता है और साथ ही साथ इसके सिर पर काले व सफेद धब्बे पाए जाते हैं | यह मक्खी आमतौर पर खीरा, करेला, टिंडा, तोरई, लौकी, खरबूज, तरबूज आदि सब्जियों क्षति पहुंचाती है | मादा मक्खी की विशेषता फल के छिलके में बारीक छेद कर अंडे देती है | जिससे की अंडे से मैगेट (लार्वा) निकलकर फलों के अंदर का पूरा भाग खाकर नष्ट कर देते है | यह कीट फल के जिस भाग में छेद करके अंडा देता है वह भाग टेढ़ा होकर पूरी तरह से सड़ जाता है |

प्रबंधन ( MANAGEMENT )

  • जो भी क्षतिग्रस्त फल होते है उससे तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए |
  • गर्मी के मौसम में खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए |
  • 20 मि.ली. मैलाथियान 50 ई.सी. व 200 ग्राम चीनी या गुड़ को 20 लीटर पानी में मिलाकर कुछ जो चुने हुए पौधों पर छिड़क देना चाहिए | इससे वयस्क आकर्षित होकर आते हैं और फल मक्खी सम्पूर्ण तरीके से नष्ट हो जाते हैं |
  • कार्बेरिल (0.1 प्रतिशत) कीटनाशक (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करना काफी लाभदायक है, लेकिन ध्यान देने योग बाते रासायनिक दवा का छिड़काव फल तोड़कर ही करना चाहिए |

खीरा का भंडारण  ( STORAGE OF CUCUMBER )

खीरा की खेती लगभग सभी जगह पर की जाती है और  इसके लाभकारी गुणों के कारण इसका प्रयोग हर जगह किया जाता है । खीरा के फलों का प्रयोग अधिकतर बड़े-बड़े होटलों में सलाद के मुख्य रूप में अधिक प्रयोग करते हैं । जिसके फलस्वरूप इन फलों को लम्बे समय तक रोकना (Storage) पड़ता है । अत: खीरा गर्मी की फसल होने के कारण फलों को 10 डी०सेग्रेड तापमान पर स्टोर किया जा सकता है

खीरा खाने के फायदे ( BENEFITS OF EATING CUCUMBER )

खीरा की खेती की बात करे तो यह ना तो केवल एक हेल्दी खानपान हमारी सेहत के लिए बेहद जरूरी है बल्कि इससे हम अच्छा मुनाफा भी कमा सकते है |

खीरा खाने के फायदे की बात करे तो यह हमे बीमारियों से बचाता है और वहीं लोग खाने के साथ सलाद का भी काफी सेवन करते हैं। तो किसान भाइयो आप सभी को ये बताते चलें कि सलाद और खासतौर पर खीरा खाने से सेहत को कई फायदे मिलते हैं।

तो चलिए जानते हैं कि खीरा हमारे शरीर को किन-किन बीमारियों में फायदा पहुचता है:

डायबिटीज में लाभकारी ( BENEFICIAL IN DIABETES )

खीरा खाने से फायदे में सबसे लाभकारी फायदा यह डायबिटीज वाले मरीजों के ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। खीरा शुगर मरीज के रक्त में मौजूद शर्करा को सोखता तो है ही और साथ ही खीरा शर्करा के पाचन को भी धीमा करने में मदद करता है।

जोड़ों के दर्द में लाभकारी ( BENEFICIAL IN JOINT PAIN )

 आमतौर पर देखा जाता है आज कल घर में बुजुर्ग ही नहीं बल्कि नौजवान भी जोड़ों के दर्द से परेशान होते हैं। ऐसे में खीरा आपकी बहुत मदद कर सकता है। इसके लिए आपको करना ये है कि खीरे और गाजर के रस को अच्छे से मिलाकर इसका सेवन रोजाना करना है। खीरे में उपस्थित सीलिशिया आपको जोड़ों के दर्द में काफी हद तक आराम देने का काम करता है।

इम्यूनिटी बूस्ट करने में होती है मदद ( HELPS IN BOOSTING IMMUNITY )

 जैसा की आज सभी कोरोना वायरस से वाकिफ है इस कोरोना वायरस ने ये बता दिया कि इम्यूनिटी को मजबूत करना कितना जरूरी है| खीरा आपको केवल  कोरोना से ही नहीं बल्कि बाकी अन्य कई गंभीर बीमारियों से भी बचाता है। ऐसे में आप अपने इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए अपने आहार में खीरे को सलाद के रूप में शामिल कर सकते हैं।

स्किन और बालों की समस्या में लाभदायक ( BENEFICIAL IN SKIN AND HAIR PROBLEMS )

 आज हम कई समस्या को देख रहे इसमें एक बहुत आम और बड़ी समस्या में से एक स्किन और बालों की समस्या है जिससे आज सभी परेसान है बच्चे हो या बूढ़े सभी इस समस्या से पीड़ित है | इस समस्या में  आपको खीरा आराम पहुंचा सकता है। इसमें आपको करना ये है कि खीरे के जूस को पालक और गाजर के जूस के साथ मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए |

खीरा खाने के कुछ अन्य फायदे ( SOME OTHER BENEFITS OF EATING CUCUMBER )

  • खीरा मुख्य रूप से शरीर को जलमिश्रित ( Hydrated ) रखने में मदद करता है | खीरे में लगभग 95% पानी रहता है। इसलिए यह शरीर से विषाक्त और अवांछित पदार्थों को निकालने में मदद करके शरीर को स्वस्थ रखने में सहयोग करता है |
  • खीरा हैंगओवर को कम करने में बहुत मदद करता है | जैसा की आप जानते है शराब पीने के बहुत सारे दुष्परिणाम होते हैं और उनमें अगले दिन का हैंगओवर बहुत ही कष्ट देनेवाला होता है। इससे बचने के लिए आप रात को सोने से पहले खीरा का सेवन करे। क्योंकि खीरे में जो विटामिन बी, शुगर और इलेक्ट्रोलाइट होते हैं वे मुख्य रूप से हैंगओवर को कम करने में बहुत मदद करते हैं।
  • खीरा वज़न घटाने में मदद करता है | खीरे में कैलोरी की कम और फाइबर की उच्च मात्रा होता है। इसलिए मीड डे में भूख लगने  पर अगर आप खीरा खा रहे तो आपका पेट देर तक भरा हुआ रहता है।
  • खीरा कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है | खीरा एक ऐसा सब्ज़ी है जिसमें कोलेस्ट्रोल की मात्रा बिल्कुल नहीं होता है। जिन लोगों को दिल की बीमारी होती है उनको खीरा रोजाना  खाना चाहिए। अध्ययन के अनुसार खीरा में स्ट्रेरोल (sterols) नाम का यौगिक होता है वह कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है।
  • हजम शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है | आपको बता दे कि रोज खीरा खाने से पेट की बीमारी से बहुत हद तक राहत मिल जाता है, जैसे- कब्ज़, बदहजमी, अल्सर आदि। क्योंकि इसमें जल की मात्रा अधिक होने के कारण यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल देता है और उच्च फाइबर की मात्रा पेट को साफ करने में बहुत मदद करता है। और इसमें जो इरेप्सिन नाम का एन्जाइम होता है वह मुख्यतः प्रोटीन को सोखने में मदद करता है।

खीरा की खेती ( Cucumber Ki Kheti ) का कुछ महत्वपूर्ण बिंदु जिसपर हमने ऊपर ब्लॉग में चर्चा किया है | आशा करती हु किसान भाइयो और जो भी इस ब्लॉग को पढ़ रहा उसे इस खीरा की खेती के ब्लॉग से कुछ सिखने को मिलेगा |

आप सभी से अनुरोध है कि इस ब्लॉग को पढ़े और जहा भी गलती नजर आए कृपया कमेंट में लिख कर भेजे और आप किस सब्जी, फसल, फुल या कृषि उपकरण के बारे में और जानना चाहते है तो भी आप हमे कमेंट के जरिये बता सकते है |

आपको हमारा ये छोटा सा प्रयास अच्छा लगा हो तो हमे सपोर्ट करे इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे धन्यवाद |

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

प्रश्न- खीरा की खेती कौन से महीने में होती है?

उतर- खीरा की फसल का चक्र यानि साइकल 60 से 80 दिनों में पूरा होता है | लेकिन बरसात के मौसम में खीरे की फसल ज्यादा अच्छी के साथ साथ पैदावार भी अच्छा होता है | खीरे की बुवाई या खीरा की खेती के लिए सही महीना फरवरी महीने का दूसरा हफ्ता सबसे अच्छा माना जाता है |

प्रश्न-खीरे की खेती कैसे की जाए?

उतर- खीरा की खेती मुख्यतः इन विधि से करेगे तो आपको मिलेगा अच्छा मुनाफा –
1. छोटी सुरंगी विधि ( SHORT TUNNEL METHOD )
खीरा की खेती के लिए इस विधि का प्रयोग जल्दी पैदावार लेने के लिए किया जाता है| यह विधि मुख्य रूप से फसल को दिसंबर और जनवरी की ठंड से बचाती है|इस विधि में खीरा को दिसंबर के महीने में 2.5 मीटर चौड़े बैडों पर बीज की बोवाई की जाती है| इसमें खीरा के बीजों को बैड के दोनों तरफ 45 सैं.मी. के फासले पर बोयें| बिजाई से पहले 45-60 सैं.मी. लम्बे और सहायक डंडों को मिट्टी में अच्छे से गाढ़े| खेत को प्लास्टिक की शीट (100 गेज़ मोटाई वाली) को डंडों की सहायता से अच्छी तरह से ढक दें| फरवरी महीने में तापमान सही होने पर पुनः प्लास्टिक शीट को हटा दें|
2. गड्ढे खोद कर बिजाई करना ( SOWING BY DIGGING A PIT )
3. खालियां बनाकर बिजाई करना ( SOWING BY MAKING BLANKS )
4. गोलाकार गड्ढे खोद कर बिजाई करना (SOWING BY DIGGING A CIRCULAR PIT  )

प्रश्न-खीरे में कौन कौन से तत्व पाए जाते हैं?

उतर– खीरे में 95 फीसदी पानी होता है | खीरा में विटामिन सी, विटामिन के, कॉपर, मैग्नीशियम, पोटेशियम, मैंगनीज और सबसे महत्वपूर्ण सिलिका जैसे आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। ये पोषक तत्त्व खासतैर पे त्वचा और बालों को पोषण देने के लिए बहुत लाभदायक माने जाते है।

प्रश्न- खीरा कौन से महीने में बोया जाता है?

उतर- खीरा लगाने का सही समय की बात करे तो ग्रीष्म में खीरा की खेती के लिए बुवाई फरवरी-मार्च में की जाती है |
1. वर्षा में खीरा की खेती या खीरा लगाने का  सही समय जून-जुलाई होती है |
2. पर्वतीय इलाको में खीरा की खेती के लिए बूवाई अप्रैल माह में की जाती है |

प्रश्न-खीरा का पौधा कितने दिन में फल देता है?

उतर- खीरा का पौधा के फल की बात करे तो यह किस्मो पर निर्भर करती है और वैसे बात करे तो खीरा के बीज बुवाई के ठिक 2 महीने  के बाद ही फसल तैयार हो जाता है |

About sapana

Studied MSc Agriculture from Banaras Hindu University and having more than 2 years of field experience in field of Agriculture.

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