2026 में लहसुन की खेती (Lahsun ki Kheti) से बम्पर पैदावार: बस ये 5 गलतियां न करें!

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लहसुन की खेती (Lahsun ki Kheti) (Allium sativum) भारत की सबसे महत्वपूर्ण मसाला फसलों में से एक है। विश्व में चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा लहसुन उत्पादक देश है। वर्ष 2023 में भारत का कुल लहसुन उत्पादन 31.07 लाख मीट्रिक टन रहा, जो पिछले एक दशक में 1.259 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर इस स्तर पर पहुंचा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश लहसुन उत्पादन में अग्रणी राज्य हैं।

लहसुन की खेती (Lahsun ki Kheti)
लहसुन की खेती (Lahsun ki Kheti)

Table of Contents

लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी

जलवायु आवश्यकताएं

लहसुन एक रबी मौसम की फसल है जो ठंडी जलवायु में बेहतर विकास करती है। बल्ब निर्माण के लिए 25-30°C का औसत तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। अत्यधिक गर्मी और वर्षा इसकी खेती के लिए अनुकूल नहीं है।

 मिट्टी की आवश्यकताएं 

बलुई दोमट या दोमट मिट्टी जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो, लहसुन की खेती के लिए सर्वोत्तम है। NHRDF और KVK की सिफारिशों के अनुसार मापदंड अनुशंसित मान |

मिट्टी का प्रकार – लहसुन के लिए बलुई दोमट, दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है |

pH स्तर – 6.0 – 7.0 तक होना चाहिए |

जैविक पदार्थ-अच्छी मात्रा में होना चाहिए |

जल निकासी -उत्तम व्यवस्था होनी चाहिए |

अत्यधिक क्षारीय और लवणीय मिट्टी लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त नहीं है।

लहसुन की उन्नत किस्में (Improved Varieties)

ICAR-DOGR और NHRDF द्वारा विकसित उन्नत किस्मों का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2024 में AINRPOG के माध्यम से कई नई किस्में विकसित की गई हैं।[6]

 प्रमुख अनुशंसित किस्में

किस्म का नामअवधि (दिन)उपज (क्विंटल/हे.)विशेषताएं
यमुना सफेद 1 (G-1)150-160150-160कंद ठोस, बाहरी त्वचा चांदी जैसी सफेद होती है |
यमुना सफेद 2 (G-50)165-170130-140बैंगनी धब्बा एवं झुलसा रोग प्रतिरोधी के लिए उपयुक्त होता है |
यमुना सफेद 3 (G-282)140-150175-200निर्यात हेतु उत्तम, 15-16 कलियां प्रति कंद होता है |
यमुना सफेद 4 (G-323)165-175200-25018-23 कलियां प्रति कंद, निर्यात योग्य होता है |
भीमा ओमकर120-13580-140सफेद कंद, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान के लिएउपयुक्त होता है |
भीमा पर्पल120-13560-70बैंगनी रंग, AP, बिहार, महाराष्ट्र के लिए लिए उपयुक्त है |
एग्रीफाउंड पार्वती165-175170-220पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त होता है |

मेरा अनुभव: मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों के साथ काम करते हुए मैंने पाया कि G-282 (यमुना सफेद 3) किस्म सबसे अधिक पसंद की जाती है क्योंकि इसकी गांठें बड़ी होती हैं और बाजार में अच्छा भाव मिलता है।

बुवाई का समय और विधि

बुवाई का उचित समय  

मैदानी क्षेत्र मे लहसुन क बुवाई अक्टूबर-नवंबर की जाती है |

पहाड़ी क्षेत्र मे मार्च-अप्रैल मे लहसुन की बुवाई करते है |

लहसुन की खेती के लिए सर्वोत्तम समय 15 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होता है |

नासिक (महाराष्ट्र) के लिए  25 अक्टूबर से 5 नवंबर और करनाल (हरियाणा) के लिए 15 सितंबर से 30 अक्टूबर का समय अनुशंसित है।

बीज दर और बीज उपचार

बीज दर: लहसुन  की खेती के लिए 5-7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (150-200 किलोग्राम प्रति एकड़) बीज की आवश्यकता होती है |

बीज उपचार (अत्यंत महत्वपूर्ण):

बुवाई से पूर्व कलियों को कार्बेंडाजिम + मैंकोज़ेब (3 ग्राम/लीटर पानी) के घोल में 3-5 मिनट तक डुबोकर उपचारित करें। इससे मिट्टी जनित रोगों से बचाव होता है।

 बुवाई की विधि

विधिकतार से कतारपौधे से पौधेगहराई
छोटी कलियों वाली किस्में12.5 सेमी7.5 सेमी5-7 सेमी
बड़ी कलियों वाली किस्में15 सेमी10 सेमी5-7 सेमी
व्यावहारिक (मेढ़ पर)5 इंच4 इंच2-2.5 इंच

बुवाई के टिप्स:

  • कलियों का पतला हिस्सा (अंकुर वाला) ऊपर की ओर रखें |
  • मुरझाई और सूखी कलियों का उपयोग न करें |
  • मध्य की सीधी कलियों का उपयोग बुवाई के लिए न करें |
लहसुन की खेती

खेत की तैयारी (Package of Practices)

जुताई और मिट्टी प्रबंधन

खेत को 2-3 बार कल्टीवेटर से जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए। मिट्टी का एकदम भुरभुरा होना जड़ विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

हार्ड मिट्टी के लिए: 50 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट (पाउडर) पूरे खेत में डालने से मिट्टी नरम और भुरभुरी होती है।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

KVK और NHRDF की अनुशंसा के अनुसार:

जैविक खाद (बेसल डोज): गोबर की सड़ी खाद 10-15 टन प्रति हेक्टेयर (20-25 टन अनुशंसित)

  • बुवाई से कम से कम 3 सप्ताह पूर्व खेत में मिलाएं

रासायनिक उर्वरक (NPK): लहसुन के लिए  नाइट्रोजन (N) 100 किग्रा/हे, फॉस्फोरस (P) 50किग्रा/हे,

पोटाश (K) 50किग्रा/हे, सल्फर (S) 30-50 किग्रा/हे और जिंक सल्फेट  20 किग्रा/हे तक उर्वरक उपयोग किया जाता है |

समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) – NHRDF अनुशंसा: 

50% रासायनिक + 50% जैविक के लिए: NPK @ 50:25:25 किग्रा/हे ,सल्फर @ 25 किग्रा/हे, जिंक @ 10 किग्रा/हे, एज़ोस्पिरिलम या एज़ोटोबैक्टर @ 10 किग्रा/हे और फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया @ 10 किग्रा/हे तक पोषक तत्व उपयोग होता है |

टॉप ड्रेसिंग शेड्यूल:

समयखाद/उर्वरक
30-35 दिनयूरिया 50 किग्रा + सूक्ष्म पोषक तत्व
50-55 दिनयूरिया 40 किग्रा + जिंक
75-90 दिनNPK 13:0:45 @ 1% फोलियर स्प्रे

विशेष अनुशंसा: GA3 @ 25 ppm का छिड़काव 45 और 60 दिन बाद करने से उपज और गुणवत्ता में वृद्धि होती है।

सिंचाई प्रबंधन

अवस्थासिंचाई अंतराल
बुवाई के तुरंत बादपहली हल्की सिंचाई
वानस्पतिक वृद्धि8-10 दिन के अंतराल पर
परिपक्वता10-15 दिन के अंतराल पर
खुदाई से पूर्व15-20 दिन पहले बंद करें

सिंचाई के महत्वपूर्ण बिंदु:

  • बुवाई के पहले 30 दिनों  में सिंचाई का विशेष ध्यान रखें |
  • जलभराव से बचें – इससे जड़ सड़न (Root Rot) हो सकती है |
  • ड्रिप सिंचाई या मिनी स्प्रिंकलर का उपयोग अधिक प्रभावी है |

वैरायटी के अनुसार सिंचाई अवधि:

  • देसी वैरायटी: 115-120 दिन तक की अवधि होती है |
  • ऊटी वैरायटी: 110 दिन तक की अवधि होती है |
  • G-282: 125-130 दिन तक की अवधि होती है |

निराई-गुड़ाई और खरपतवार प्रबंधन

दो बार निराई-गुड़ाई अनिवार्य है:

  • पहली निराई: बुवाई के 30-35 दिन बाद करना चाहिए |
  • दूसरी निराई: 60-65 दिन बाद करना चाहिए |

खरपतवारनाशक (Weed Control):

  • पेंडीमेथालिन @ 3.5 लीटर/हे. + एक हाथ निराई या ऑक्सीफ्लोरफेन @ 0.25 किग्रा a.i./हे. + एक हाथ निराई करना चाहिए |

 रोग एवं कीट प्रबंधन

प्रमुख रोग और नियंत्रण

बैंगनी धब्बा रोग (Purple Blotch) – Alternaria porri

लक्षण: पत्तियों पर बैंगनी या भूरे रंग के धब्बे, किनारे हल्के पीले

नियंत्रण:- मैंकोज़ेब (डाइथेन M-45) @ 0.25% या ज़िरम (डाइथेन Z-78)  @ 0.3% + ट्राइटन स्टिकर @ 0.06% 15 दिन के अंतराल पर  छिड़काव |

स्टेमफिलियम झुलसा (Stemphylium Blight)

लक्षण: पत्तियों पर पीले-भूरे धब्बे जो बाद में झुलसा देते हैं |

नियंत्रण: हेक्साकोनाज़ोल (5% SC) 1 मिली/लीटर या प्रोपिकोनाज़ोल (25% EC) 1 मिली/लीटर को 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करे | 

 सफेद सड़न (White Rot) – Sclerotium cepivorum

लक्षण: पत्तियों का पीलापन तथा कंद के पास सफेद रोएंदार कवक जाल पाए जाते है |

नियंत्रण: इसके नियंत्रण के लिए फसल चक्र अपनाएं (3-4 वर्ष) और संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें | लहेसुन के बीज को कार्बेंडाजिम से उपचारित करे |

प्रमुख कीट और नियंत्रण

थ्रिप्स (Thrips tabaci) – ये सबसे महत्वपूर्ण कीट है |

लक्षण: पत्तियों का रस चूसते हैं, पत्तियां चितकबरी दिखती हैं और शीर्ष भूरे होकर सूख जाते हैं |

नियंत्रण:

कीटनाशकमात्राअंतराल
इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL5 मिली/15 लीटर पानी15 दिन
फिप्रोनिल 5% SC0.10%10 दिन
स्पिनोसैड 45% SC0.10%10-15 दिन
डेल्टामेथ्रिन 2.8% EC0.10%15 दिन

जैविक नियंत्रण: नीम तेल 5 मिली/लीटर पानी 7-10 दिन में छिड़काव करे और खरपतवार नियंत्रण करे | स्प्रिंकलर सिंचाई से कीट संख्या कम होती है |

हार्वेस्टिंग और भंडारण

हार्वेस्टिंग का समय

लहसुन की फसल बुवाई के 4-5 माह बाद (मार्च-अप्रैल में) हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाती है।

हार्वेस्टिंग के संकेत के लिए आमतौर पत्तियां पीली पड़ने लगें और सूखने लगें तो लहसुन की हार्वेस्टिंग कर ले |

हार्वेस्टिंग के लिए संकेत ये भी है की जब लहसुन की पत्तियां गिरने लगें (75-100% neck fall) |

लहसुन की कंद के पास पौधा कमजोर हो जाता है |

हार्वेस्टिंग से पहले: सिंचाई 15-20 दिन पहले बंद कर दें |

क्योरिंग (Curing)

क्योरिंग का महत्व: लहसुन की बल्ब से अतिरिक्त नमी निकालना जिससे भंडारण में सड़न न हो |

विधि:

  • हार्वेस्टिंग के बाद कंदों को 3-4 दिन खेत में या 7-10 दिन छाया में सुखाएं |
  • डंठल को कंद से 2-2.5 सेमी ऊपर  से काटें |
  • लहसुन की जड़ें हटा दें |
  • लहसुन को फिर 3-5 दिन और सुखाएं |

कृत्रिम क्योरिंग: 27-35°C तापमान पर गर्म हवा प्रवाहित करें और 60-75% आर्द्रता पर 48 घंटे में प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है |

भंडारण

भंडारण की शर्तें:

मापदंडअनुशंसित मान
तापमान0-2°C
आर्द्रता60-70%
भंडारण अवधि5-6 माह

भंडारण के तरीके: भंडारण  मे लहसुन को कोइया बनाकर  (20-30 डंठल प्रति कोइया) लटकाएं |

  • लहसुन को नायलॉन जाल की थैलियों में रखें |
  • लहसुन को हवादार, ठंडी और सूखी जगह पर रखें |
  • लहसुन को 3 फीट ऊंचाई तक पूरे पौधों का भंडारण सबसे उपयुक्त मन जाता है |

लागत और लाभ विश्लेषण (2026)

प्रति एकड़ लागत

मदअनुमानित लागत (₹)
बीज (1.5-2 क्विंटल)15,000-20,000
खाद एवं उर्वरक8,000-10,000
जुताई एवं तैयारी3,000-5,000
सिंचाई2,000-3,000
कीटनाशक/दवाइयां3,000-4,000
श्रमिक5,000-8,000
कुल लागत35,000-50,000

प्रति एकड़ आय

विवरणअनुमान
औसत उपज40-60 क्विंटल
बाजार भाव (2026)₹60-100/किग्रा
कुल आय₹2,40,000-5,00,000
शुद्ध लाभ₹1,70,000-3,30,000

मेरा अनुभव:हजारीबाग के किसानों के साथ काम करते हुए मैंने देखा कि सही किस्म, समय पर बुवाई और उचित प्रबंधन से किसान एक एकड़ से 2.8 लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।

सरकारी सब्सिडी और योजनाएं (2026)

मसाला विस्तार कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लहसुन की खेती पर 12,000 रुपये प्रति हेक्टेयर (40% अनुदान) दिया जा रहा है।

विवरणराशि
लागत मूल्यांकन .₹30,000/हे
अनुदान40% (अधिकतम ₹12,000/हे.
न्यूनतम क्षेत्र0.2 हेक्टेयर
अधिकतम क्षेत्र4.0 हेक्टेयर

आवेदन: उद्यान विभाग यूपी की वेबसाइट http://dbt.uphorticulture.in पर ऑनलाइन

एकीकृत बागवानी मिशन

महोबा और अन्य जिलों में ₹20,000 प्रति हेक्टेयर  अनुदान उपलब्ध है |

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सवाल-जवाब (FAQ)

लहसुन की बुवाई का सही समय क्या है?

मैदानी क्षेत्रों में 15 अक्टूबर से 15 नवंबर का समय सर्वोत्तम है।

प्रति एकड़ कितना बीज लगता है?

1.5-2 क्विंटल (150-200 किग्रा) स्वस्थ कलियां।

लहसुन में पीलापन क्यों आता है?

पोषक तत्वों की कमी, अधिक सिंचाई, या फफूंद रोग के कारण। जिंक और सल्फर का छिड़काव लाभदायक है।

कौन सी किस्म सबसे अधिक उत्पादन देती है?

यमुना सफेद 4 (G-323) जो 200-250 क्विंटल/हे. तक उपज देती है |

लहसुन में थ्रिप्स का नियंत्रण कैसे करें?

इमिडाक्लोप्रिड 5 मिली/15 लीटर या फिप्रोनिल 0.1% का 10-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव।

निष्कर्ष और सिफारिशें

लहसुन की खेती किसानों के लिए अत्यधिक लाभदायक है, बशर्ते वैज्ञानिक तरीकों का पालन किया जाए। KVK प्रशिक्षण के बाद किसानों द्वारा उन्नत तकनीकों को अपनाने से उत्पादन में 65-75% तक वृद्धि देखी गई है।

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About sapana

Studied MSc Agriculture from Banaras Hindu University and having more than 2 years of field experience in field of Agriculture.

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