नवंबर में अपने बागबान को दें नया लुक; गेंदा, गुलदाउदी और डहेलिया के पौधों से बढ़ेगी आपके आंगन की रौनक

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

गुलाबी ठंड की दस्तक और गुनगुनी धूप का आना इस बात का इशारा है कि अब हमारी मिट्टी को एक नया जीवन देने का समय आ गया है। नवंबर का महीना भारतीय बागवानी और खेती-किसानी के लिए एक उत्सव की तरह होता है। इस समय मौसम का मिजाज न तो बहुत गर्म होता है और न ही अत्यधिक ठंडा, जिससे पौधों को पनपने का सबसे अनुकूल माहौल मिलता है। यदि आप भी अपने घर के आंगन, छत या बगीचे को रंग-बिरंगे फूलों से महकाना चाहते हैं, तो यह बिल्कुल सही समय है। गेंदा, गुलदाउदी और डहेलिया जैसे जादुई फूल आपके बगीचे की पूरी तस्वीर बदल सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस नवंबर आप अपने बागबान को कैसे एक नया और आकर्षक लुक दे सकते हैं।

Gemini Generated Image yxjdz0yxjdz0yxjd 1

आखिर नवंबर का महीना बागवानी के लिए क्यों है इतना खास?

अक्सर लोग सोचते हैं कि बागवानी तो किसी भी महीने की जा सकती है, लेकिन नवंबर की बात कुछ अलग ही है। इस महीने में वातावरण का तापमान धीरे-धीरे गिरने लगता है। रात की ओस और दिन की मध्यम धूप पौधों के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक का काम करती है। कम तापमान के कारण फूलों के पौधों की आंतरिक वृद्धि यानी ग्रोथ बहुत अच्छी होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस मौसम में खिले हुए फूल गर्मियों की तुलना में बहुत लंबे समय तक तरोताजा और जीवंत बने रहते हैं। अगर आप इस समय सही तरीके से रोपाई करते हैं, तो आने वाले पूरे शीतकाल में आपका घर और बगीचा फूलों की खुशबू और रंगों से सराबोर रहेगा।

इन तीन प्रमुख फूलों से सजाएं अपना बगीचा

इस मौसम में वैसे तो कई तरह के पौधे लगाए जा सकते हैं, लेकिन तीन ऐसे फूल हैं जिनके बिना सर्दियों का बगीचा अधूरा माना जाता है।

पहला है गेंदा (Marigold)। यह भारतीय घरों का सबसे पसंदीदा और पारंपरिक फूल है। गेंदा न केवल अपने चटक पीले, नारंगी और सुनहरे रंगों से बगीचे को खूबसूरत बनाता है, बल्कि इसकी प्राकृतिक खुशबू मन को असीम शांति देती है। गेंदे के पौधे में एक खास खूबी यह भी होती है कि इसकी गंध से कई तरह के हानिकारक कीट-पतंगे आपके अन्य पौधों से दूर रहते हैं। यह रंग और सुरक्षा दोनों का बेहतरीन मेल है।

दूसरा प्रमुख पौधा है गुलदाउदी (Chrysanthemum)। इसे सर्दियों की रानी भी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। गुलदाउदी के पौधे में एक साथ अनगिनत कलियां आती हैं और जब ये खिलती हैं, तो पूरा पौधा फूलों के एक बड़े गुलदस्ते जैसा दिखने लगता है। यह सफेद, पीला, लाल, बैंगनी और मिश्रित रंगों में आता है। सर्दियों में बागवानों का यह सबसे ज्यादा पसंदीदा फूल है क्योंकि एक बार खिलने के बाद इसके फूल करीब एक महीने तक वैसे के वैसे ही बने रहते हैं।

तीसरा शानदार फूल है डहेलिया (Dahlia)। अगर आप अपने बगीचे में कुछ ऐसा चाहते हैं जो दूर से ही हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच ले, तो डहेलिया से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। इसके फूल आकार में बहुत बड़े, घने और बेहद खूबसूरत होते हैं। इसके आकर्षक रंगों और विशाल आकार के कारण इसे फूलों का राजा भी माना जाता है। गमलों और क्यारियों, दोनों ही जगहों पर डहेलिया की शान देखते ही बनती है।

शानदार बागवानी के लिए मिट्टी और रोपाई की सही तैयारी

पौधों की अच्छी सेहत इस बात पर निर्भर करती है कि आपने उनके लिए बिस्तर कैसा तैयार किया है। इसके लिए सबसे पहले आपको उपजाऊ मिट्टी (पॉटिंग मिक्स) तैयार करनी होगी। सामान्य बगीचे की मिट्टी में कम से कम तीस से चालीस प्रतिशत अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद या केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) जरूर मिलाएं। गोबर की खाद मिट्टी को प्राकृतिक रूप से भुरभुरा बनाती है और उसमें हवा का संचार बढ़ाती है, जिससे पौधों की जड़ों को फैलने में आसानी होती है।

मिट्टी तैयार करने के बाद, पौधों को गमले या क्यारी में लगाते समय यह ध्यान रखें कि उन्हें बहुत गहराई में न दबाएं। नर्सरी से लाए गए छोटे पौधों (पौध) को शाम के समय रोपना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस समय तेज धूप न होने से पौधों के खराब होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। रोपाई के तुरंत बाद हल्का पानी जरूर दें ताकि मिट्टी जड़ों के साथ अच्छे से बैठ जाए।

देखभाल के चार सबसे जरूरी नियम जिनका रखना होगा ध्यान

पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित और सही देखभाल ही उन्हें फूलों से भर सकती है। इसके लिए आपको मुख्य रूप से चार बातों पर विशेष ध्यान देना होगा।

पहली बात है धूप की उपलब्धता। सर्दियों के इन सभी फूल वाले पौधों को भरपूर धूप की आवश्यकता होती है। इसलिए इन्हें हमेशा ऐसी जगह पर रखें या लगाएं जहां दिन में कम से कम पांच से छह घंटे की सीधी और अच्छी धूप आती हो। छांव में रखने पर पौधों की पत्तियां तो बढ़ेंगी, लेकिन उनमें कलियां और फूल नहीं आ पाएंगे।

दूसरी बात है पानी देने का सही तरीका। फूलों के पौधों को नियमित रूप से पानी की जरूरत होती है, लेकिन पानी तभी दें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी हुई दिखे। गमले में पानी का ठहराव या जलभराव (Waterlogging) बिल्कुल नहीं होना चाहिए। अगर जड़ों के पास पानी हमेशा जमा रहेगा, तो जड़ें सड़ जाएंगी और पौधा असमय ही खराब हो जाएगा। इसलिए गमले के नीचे का निकास छेद (Drainage Hole) हमेशा खुला रहना चाहिए।

तीसरी बात है पोषण की खुराक। पौधों को लगातार फूल देने के लिए ताकत की जरूरत होती है। इसके लिए महीने में कम से कम एक बार मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके उसमें थोड़ी सी हल्की जैविक खाद, जैसे गोबर की खाद या नीम की खली जरूर डालें। यह पौधों को लगातार पोषण देता रहेगा।

चौथी और आखिरी बात है पौधों की पिंचिंग और सूखी पत्तियों की सफाई। जब गेंदा और गुलदाउदी के पौधे थोड़े बड़े होने लगें, तो उनकी ऊपरी कोपलों को उंगलियों से हल्का सा तोड़ (पिंच) दें। इससे पौधा सीधा बढ़ने के बजाय चारों तरफ से नई शाखाएं निकालेगा और जितना घना पौधा होगा, उतने ही ज्यादा फूल आएंगे। साथ ही, समय-समय पर सूखी पत्तियों और मुरझाए हुए फूलों को कैंची से काटते रहें ताकि पौधे की ऊर्जा नई कलियां बनाने में खर्च हो।

अब आगे क्या करें: कदम-दर-कदम गाइड

  1. सबसे पहले अपने नजदीकी विश्वसनीय नर्सरी पर जाएं और वहां से स्वस्थ, हरी-भरी पत्तियों वाले गेंदा, गुलदाउदी और डहेलिया के छोटे पौधे या पौध (Saplings) खरीदकर लाएं।
  2. रोपाई के लिए सही आकार के गमलों का चुनाव करें। गेंदे और गुलदाउदी के लिए 8 से 10 इंच का गमला और डहेलिया के भारी-भरकम फूलों के लिए कम से कम 12 इंच का गमला सबसे बढ़िया रहेगा।
  3. गमले की मिट्टी तैयार करते समय उसमें गोबर की खाद और थोड़ी सी सूखी पत्तियां या कोकोपीट मिलाएं ताकि मिट्टी हल्की और उपजाऊ बने।
  4. पौधों की रोपाई हमेशा शाम के समय या छांव में करें और रोपने के बाद उन्हें तुरंत पानी दें।
  5. गमलों को दो-तीन दिनों के लिए हल्की छांव में रखें और जब पौधे पूरी तरह से मिट्टी पकड़ लें, तो उन्हें उठाकर सबसे ज्यादा धूप वाली जगह पर रख दें।
  6. हर हफ्ते पौधों का निरीक्षण करें, मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें और जरूरत के अनुसार ही पानी दें।

सावधानी और बचाव के तरीके

सर्दियों के मौसम में कभी-कभी पौधों पर छोटे-छोटे काले या हरे रंग के कीड़ों (एफिड्स या चेपा) का हमला हो जाता है, खासकर गुलदाउदी पर। इनसे बचने के लिए रासायनिक कीटनाशकों के बजाय प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल करें। आप हर 15 दिन में एक बार नीम के तेल का पानी में घोल बनाकर (एक लीटर पानी में 5 एमएल नीम का तेल और दो-तीन बूंदें लिक्विड सोप) पौधों पर छिड़काव कर सकते हैं। इसके अलावा, सुबह के समय पौधों पर बहुत अधिक पानी छिड़कने से बचें, क्योंकि पत्तियां लंबे समय तक गीली रहने से उन पर फंगस (फफूंद) लगने का डर रहता है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

About sapana

Studied MSc Agriculture from Banaras Hindu University and having more than 2 years of field experience in field of Agriculture.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *