ड्रैगन फ्रूट्स ( Dragon Fruit ) : अनोखी रंगत वाला स्वादिष्ट फल जो दुनिया को मोह लेता है

ड्रैगन फ्रूट्स
ड्रैगन फ्रूट्स

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ड्रैगन फ्रूट्स ( Dragon Fruits )

ड्रैगन फ्रूट्स ( Dragon Fruits ) इस समय काफी चर्चा में है। ड्रैगन फ्रूट्स की खेती भारत में बहुत ही कम समय में लोकप्रियता हासिल कर चुकी है। इसके नाम से पता चल रहा है कि यह एक विदेशी फल है। ड्रैगन फ्रूट रसीला और औषधीय गुणों से भरपूर है। ड्रैगन फ्रूट एक नकदी फसल है, और किसानों को ज्यादा मुनाफा देने वाली है। भारत के कई राज्यों के प्रगतिशील किसान ड्रैगन फ्रूट्स की खेती कर मुनाफा कमाना प्रारम्भ भी कर चुके है। लेकिन निराशा की बात ये है, कि बहुत ही कम किसानों को इसकी खेती के बारे में जानकारी है।

तो आइए, हम आपको इस ब्लॉग में ड्रैगन फ्रूट्स की खेती ( Dragon Fruits Farming in Hindi ) को विस्तार से बताते है, और आशा करते है, आपको हमारा ये छोटा सा प्रयाश अच्छा लगेगा और ऐसे ही अन्य जानकारी के लिए आप हमारे unnatkhetibadi पेज से जुड़ कर हमे सपोर्ट करे। अगर आपको ये जानकारी अच्छी लगती है तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करे और हमे कमेंट के जरिये बताए ।

ड्रैगन फ्रूट्स गुलाबी रंग का एक रसीला मीठा फल है, लेकिन इसके रंग किस्म के आधार पर होती है। ड्रैगन फ्रूट का वैज्ञानिक नाम हिलोकेरेस अंडटस और ड्रैगन फ्रूट्स हिन्दी में पिताया या स्ट्रॉबेरी पीयर कहते है। ड्रैगन फ्रूट पौधा, नागफनी के पौधे की तरह का होता है। बाजार में यह फल 600 से 800 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिकता है।

ड्रैगन फ्रूट्स मुख्यतः थाइलैंड, वियतनाम, इज़रायल और श्रीलंका में बहुत ही लोकप्रिय है। वहां ड्रैगन फ्रूट की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। वहां के मार्केट में किसान ड्रैगन फ्रूट के अच्छे दामों में बेच कर लाखों कमाते हैं।

ड्रैगन फ्रूट्स की मांग और भाव के कारण भारत के किसान भी इसे व्यवसाय के रूप मे अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे है। ड्रैगन फ्रूट से मुख्य रूप से जैम, आइसक्रीम, जेली, जूस और वाइन बनाई जाती है। ड्रैगन फ्रूट के खाने के लाभ यह मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित किया जा सकता हैं। ड्रैगन फ्रूट के बीज किवी की तरह काफी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती ( Dragon Fruits Farming in Hindi )

ड्रैगन फ्रूट्स ( Dragon Fruits ) का मुख्य रूप से सम्बन्ध कैक्टस प्रजाति से है। ड्रैगन फ्रूट्स का मुख्यतः खपत मेक्सिको और मध्य एशिया में है, वहाँ इसे खूब खाया जाता है। ड्रैगन फ्रूट्स का स्वाद तरबूज की तरह मीठा होता है। ड्रैगन फ्रूट्स स्वास्थ्य के लिए इतने उपयोगी हैं, कि इन्हें ‘सुपरफ्रूट’ भी माना जाता है। ड्रैगन फ्रूट्स न केवल हमारी सेहत को बेहतर बनाते हैं, बल्कि इसकी खेती से लोगों की आर्थिक स्थिति में भी काफी सुधार आता है।

ड्रैगन फ्रूट्स की बात करे तो ये फल सब्जियों के आहार में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। ड्रैगन फ्रूट एक ऐसा फल है, जो अभी भारत में नया है, और ये अधिकतर गर्मी में पाया जाता है। ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लिए सबसे पहले आपको इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु को समझना होगा, जो की आपको खेती के लिए लाभकारी है। ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लिए आपको निचे दिए गए बिंदु को विस्तार पूर्वक पढ़े और ज्यादा जानकारी के लिए आप हमे कमेंट करे।

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कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इसके बीज का चुनाव अपने एरिया के अनुसार या आप के एरिया के कृषि विज्ञानं केंद्र और कृषि विभाग के सलाहकार से बात करके ले सकते है। इसको बीज और ग्राफ़्टिंग दोनों तकनीक से लगा सकते है। ड्रैगन फ्रूट्स का पौधा ग्राफ़्टिंग तकनीक से विकसित होता है, तो इसे परिपक्व होकर फल देने में कम वक़्त लगता है।

ड्रैगन फ्रूट को मार्च से जुलाई के बीच कभी भी बोया जा सकता है, और पौधे लगाने के बाद लगभग एक साल में इसका पेड़ तैयार हो जाता है, और जुलाई-अक्टूबर तक फल देता है।

इसके बेहतर उत्पाद की बात करे तो जैविक खेती सबसे उत्तम मन जाता है। सबसे पहले खेत की जुताई करवाए उसके बाद आप ड्रैगन फ्रूट के पौधे को खेत में लगाएं। ड्रैगन फ्रूट्स की खेती कैसे करे ? उसके लिए निचे दिए गए बिंदु को पढ़े।

ड्रैगन फ्रूट की खेती कब की जाती है

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती कम वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है। आप बरसात को छोड़कर किसी भी मौसम में इसके पौधे या बीज का रोपण कर सकते हैं।ड्रैगन फ्रूट्स का बीज लगाने का सही समय की बात करे तो मार्च से जुलाई के बीच में इसके पौधे और बीज लगाने के लिए बेहतर समय होता है। ध्यान रहे बहुत ज्यादा पानी के साथ ही ज्यादा सूर्य के प्रकाश से भी इसकी खेती को बहुत प्रभावित करते है। इसे सूरज की रोशनी से बचाने के लिए छायादार स्थान पर इसकी खेती की जाती है।

ड्रैगन फ्रूट के बीज और पौधे ( Dragon Fruit Plant )

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती करने से पहले आपको हमेशा ध्यान रखें, कि आप ड्रैगन फ्रूट्स के जिन भी बीज और कलम का रोपण ( Grafting of Dragon Fruit Plant ) कर रहे हैं, उनकी किस्म अच्छी के साथ ही साथ आपके क्षेत्र के अनुसार होनी चाहिए। अगर आपको अच्छा मुनाफा और उत्पादन चाहिए, तो आपको बीज की उचतम गुण वाले किस्म का चुनाव करे।

आपको लेख में बताया भी गया है, कि ड्रैगन फ्रूट्स के लिए ग्राफ्टिंग ( कलम बांधना ) उद्यानिकी की एक मुख्य तकनीक है, जिसमें एक पौधे के ऊतक दूसरे पौधे के ऊतकों में प्रविष्ट कराये जाते हैं, जिससे की दोनों के वाहिका ऊतक आपस में मिल जाते हैं। इसी प्रकार इस विधि से अलैंगिक प्रजनन द्वारा पौधे तैयार किये जाते हैं। बीज सबसे बेहतर होते हैं। इसके अलावा ग्राफ्टेड प्लांट ( Dragon Fruit Plant ) हो तो वे ज्यादा बेहतर होते है, क्योंकि कलम तैयार होने में बीज की अपेक्षा कम समय लगता है।

ड्रैगन फ्रूट की प्रमुख किस्में (Major Varieties of Dragon Fruit)

इसकी प्रमुख तीन प्रकार की किस्में होती है जो निम्नवत है-

  • सफ़ेद पिथाया ( White Dragon Fruit )
  • लाल पिथाया ( Red Dragon Fruit )
  • पीला पिथाया ( Yellow Dragon Fruit )

अन्य किस्में

वालदीव रोजा, असुनता, कोनी मायर, डिलाईट, अमेरिकन ब्यूटी, पर्पल हेज़, ISIS गोल्डन यैलो, S8 शूगर, आउसी गोल्डन यैलो, वीयतनाम वाईट, रॉयल रैड, सिंपल रैड आदि मुख किस्में है।

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु ( Suitable Climate for Dragon Fruit Cultivation )

ड्रैगन फ्रूट्स गर्मी में अधिक उष्णकटिबंधीय जलवायु के लिए उपयुक्त होते हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सबसे उपयुक्त जलवायु दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया और मध्य पूर्व तक सीमित है। इसके अलावा, ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेंटीग्रेड  से ऊपर होना चाहिए। फल के विकास के लिए उच्च तापमान की बात कर्रे तो अधिकतम  40 डिग्री सेंटीग्रेड आवश्यक होता है, लेकिन उच्च तापमान फल के लिए अत्यधिक संकट भी बन सकता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उच्च तापमान और आर्द्रता की अधिकता से बचाने के लिए, इसे बारिश से बचाना आवश्यक होता है।

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी ( Suitable Soil for Dragon Fruit Cultivation )

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लिए सभी प्रकार की उपजाऊ मिट्टी अनुकूल है। ड्रैगन फ्रूट के पौधो के लिए किसी प्रकार की ख़ास मिट्टी की ज़रूरत नहीं होती। इसे आप किसी भी तरह की ज़मीन पर उगा सकते हैं। लेकिन फिर भी दोमट, रेतिली दोमट मिट्टी से लेकर बलुवाई मिट्टी ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सबसे उपयुक्त है।

तेज़ी से जल निकासी वाली ढालदार ज़मीन पर भी ड्रैगन फ्रूट की खेती की जा सकती है। और लगभग 7-8 PH मान वाली मिट्टी मे इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। ध्यान रहे जलजमाव वाले इलाके में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए। इसकी खेती के लिए जल निकासी अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। 

भूमि की तैयारी ( Land Preparation )

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लिए खेत की अच्छी तरह से जुताई होनी चाहिए, साथ ही साथ खेत कीट-पतंगों व खरपतवारों से मुक्त होना चाहिए। भूमि में 20 से 25 टन प्रति हैक्टर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद अथवा कम्पोस्ट मिला देनी चाहिए।

प्रवर्धन एवं लगाने की विधि ( Method of Propagation and Planting )

जैसा की लेख में आपको बताया गया है कि ड्रैगन फ्रूट का मुख्य रूप से प्रवर्धन कटिंग द्वारा होता है, लेकिन इसे बीज से भी लगाया जा सकता है। ड्रैगन फ्रूट्स के प्रवर्धन करने के लिए कटिंग की लंबाई 20 सें.मी. रखते हैं। इसको खेत में लगाने से पहले गमलों में लगाया जाता है, जिसके लिए गमलों में सूखे गोबर, बलुई मृदा तथा रेत को 1:1:2 के अनुपात से भरकर छाया में रख दिया जाता है।

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती का प्रबंधन तथा तरीका

आपको पता ही होगा कि भारत में ड्रैगन फ्रूट्स एक नया  फल के रूप में उभर कर आया है, अतः अगर आपको इसकी खेती करनी है, तो किसानों भाइयो आपको इसकी खेती की पूरी जानकारी होनी चाहिए। ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रबंधन में आपको समय पर बीज बोने से लेकर फल को तब तक उगाना और तैयार करने तक के सभी चरणों को समेकित रूप से प्रबंधित करना होता है।

किसानों को अपनी फसल की निगरानी करते हुए ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। फसल की रखरखाव के लिए, उन्हें समय-समय पर पानी देना चाहिए और उन्हें खाद की जरूरत के अनुसार उपयुक्त मात्रा में खाद देनी चाहिए। फसल में कीट और रोगों के प्रति भी जागरूक रहना आवश्यक होता है।

ड्रैगन फ्रूट के पौधे बीज और पौध दोनों प्रकार से लगाया जाता है। इसके पौधों को पौध या कलम के से लगाना बेहतर होता है। कलम के रूप में लगाने पर पौधा 2 साल बाद ही पैदावार देना शुरू कर देता है। जबकि वही बीज से लगाने में इसका उत्पादन का समय कलम से  दुगना 4-5 साल लग जाते हैं। ड्रैगन फ्रूट्स के लिए जब भी कलम या बीज खरीदें, प्रमाणित या विश्वसनीय दुकान से ही खरीदें और हो सके तो इसे सदैव रजिस्टर्ड नर्सरी से खरीदें।

अंतरण (Transfer )

इसमें अधिक उत्पादन के लिए पौधे से पौधे एवं पंक्ति से पंक्ति के बीच की दूरी 2×2 मीटर रखते हैं, तथा गड्ढे का आकार 60×60×60 सें.मी. रखते हैं। इन सभी गड्ढों को कम्पोस्ट, मृदा व 100 ग्राम सुपर फास्फेट मिलाकर भर दिया जाता है।

पादप सघनता ( Plant Density )

ड्रैगन फ्रूट से अधिकतम उत्पादन लेने के लिए एक हैक्टर भूमि में लगभग आप 277 पौधे लगा सकते हैं। ट्रिमिंग व प्रूनिंग ( छटाई/Pruning) या ट्रिमिंग (Trimming) का हिंदी में अर्थ होता है, पौधों की कटाई या छंटाई करना। यदि ट्रिमिंग व् प्रूनिंग न की जाए, तो पौधों की डैमेज या रोग ग्रस्त शाखाओं से रोग पूरे पौधे और साथ ही अन्य पौधों में भी फैल सकता है। पौधों की सीधी वृद्धि एवं विकास के लिए इनको लकड़ी व सीमेंट के खंभों से सहारा प्रदान करना चाहिए। इसकी अपरिपक्व पादप तनों को इन खंभों से बांधकर, पाश्र्विक शाखाओं को सीमित रखते हुए दो से तीन मुख्य तनों को बढ़ने के लिए छोड़ देना चाहिए।

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए खाद व उर्वरक ( Manures and Fertilizers for Dragon Fruit Farming )

ड्रैगन फ्रूट्स से उत्पादन लेने के लिए प्रत्येक पौधे को अच्छी सड़ी हुई 10 से 15 कि.ग्रा. गोबर या कम्पोस्ट खाद देनी चाहिए। इसके अलावा नीम की खली लगभग 250 ग्राम, 30-40 ग्राम फोरेट एवं 5-7 ग्राम बाविस्टिन प्रत्येक गड्ढे में अच्छी तरह मिला देने से आपके पौधों में मृदाजनित रोग एवं कीट नहीं लगते हैं।

ड्रैगन फ्रूट्स में  50 ग्राम यूरिया, 50 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा 100 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश का मिश्रण बनाकर पौधों को फूल आने से पहले अप्रैल में फल विकास अवस्था तथा जुलाई-अगस्त और फल तुड़ाई के बाद दिसबंर में देना चाहिए। उर्वरक देने के तरीके की बात करे तो आप उर्वरक के दानों का उपयोग कर सकते हैं, या फिर सिंचाई प्रणाली के माध्यम से उर्वरक फैला सकते हैं। अन्य उर्वरक जैसे NPK (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम ) का अनुपात निम्न अवस्था में देना चाहिए जो की निचे दिए गए है।

पहले दो वर्षों में:- 300 ग्राम नाइट्रोजन, 200 ग्राम फास्फोरस और 200 ग्राम पोटेशियम प्रति पौधा देना चाहिए।

परिपक्व पौधे के लिए:- 540 ग्राम नाइट्रोजन, 720 ग्राम फॉस्फोरस और प्रति वर्ष 300 ग्राम पोटेशियम प्रति पौधा देना चाहिए।

फल लगने के समय:- कम मात्रा में नाइट्रोजन और अधिक मात्रा में पोटाश दिया जाना चाहिए।

ड्रैगन फ्रूट के लिए सिंचाई ( Irrigation for Dragon Fruit )

ड्रैगन फ्रूट के लिएदूसरे पौधों की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार रोपण, फूल आने एवं फल विकास के समय तथा गर्म व शुष्क मौसम में बार-बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसके लिए सिंचाई की बूंद-बूंद पद्धति का उपयोग करना चाहिए। अगर बात करे सर्दियों के मौसम की तो इस समय में इसके पौधे को महीने में दो बार सिंचाई की जरूरत होती है, जबकि वही गर्मियों में 8-12 दिन में सिंचाई की अनिवार्य रूप से कर ही देना चाहिए। ड्रैगन फ्रूट्स के लिए ड्रिप सिस्टम का उपयोग करें, और बारिश के मौसम में सिचाई की सिंचाई की आवश्यकता नही होती है।

कीट एवं व्याधियां ( Pests and Diseases )

ड्रैगन फ्रूट में कीट और व्याधियों का प्रकोप कम ही  देखने को मिलता है, फिर भी इसमें एंथ्रेक्नोज रोग ( कोलेटोट्रिचम ग्लियोस्पोरियोइड्स – एक कवक रोग है जो ड्रैगन फ्रूट को संक्रमित कर सकता है। यह तनों और फलों पर प्रभामंडल जैसा गाढ़ा घाव बनाता है।) , ड्रैगन फ्रूट स्टेम रोट व्  थ्रिप्स कीट का प्रकोप देखा गया है। एंथ्रेक्नोज रोग के नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब दवा के घोल का 0.25 प्रतिशत की दर से छिड़काव करें। थ्रिप्स के लिए एसीफेट दवा का 0.1 प्रतिशत की दर से छिड़काव करना चाहिए, और कॉपर कवकनाशी, मैंकोजेब और मेटा दावा का छिड़काव करना चाहिए।

ड्रैगन फ्रूट्स की तुड़ाई ( Harvesting Dragon Fruit )

ड्रैगन फ्रूट पहले वर्ष में ही फल देना शुरू कर देता है, और मई और जून में इसमें फूल लगते हैं। जुलाई से दिसंबर तक फल लगते हैं, तथा जून और जुलाई का महीना फलने के लिए पीक सीजन होता है। अक्सर हार्वेस्ट सीजन अक्टूबर या नवंबर में समाप्त हो जाता है लेकिन कभी-कभी दिसंबर तक चल जाता है।

इसमें फूल आने के 25-35 दिनों में फल तुड़ाई के लिए तैयार हो जाता है। इस अवधि के दौरान इसकी 6 तुड़ाई की जा सकती है। फल का परिपक्वता सूचकांक की बात करे तो कच्चे फल का रंग हरा होता हैं, जो कि पकने पर लाल रंग में परिवर्तित हो जाते हैं।

ड्रैगन फ्रूट्स कटाई को निर्धारित करने में गुणवत्ता विशेषताओं और परिपक्वता सूचकांक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक विशिष्ट सूचकांक परिपक्वता देखने के लिए ड्रैगन फ्रूट्स के त्वचा का रंग परिवर्तन लगभग पूरी तरह से लाल होना है।

ड्रैगन फ्रूट्स का उपज

इसका पौधा एक सीजन में 3 से 4 बार फल देता है। इसके प्रत्येक फल का वजन लगभग 300 से 800 ग्राम तक होता है, और एक पौधे पर 50 से 120 फल लगते हैं। इस प्रकार इसकी औसत उपज लगभग  5 से 6 टन प्रति एकड़ होती है।

ड्रैगन फ्रूट की कीमत ( Dragon Fruit Price In Hindi )

ड्रैगन फ्रूट की कीमत की बात करे तो इसके वेराईटी और सीजन के अनुसार इसका बाजार भाव लगभग 250 से 400 रुपए प्रति किलो तक जा सकता है।

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लाभ ( Benefits of Dragon Fruit Cultivation )

  • आय का स्रोत: इसकी खेती आपको एक अच्छा मुनाफा दिला सकता है। आप जानते है बाजार में एक ड्रैगन फ्रूट्स का रेट 100 से 120 रुपया तक जाता है।
  • पोषक तत्‍वों से युक्त: ड्रैगन फ्रूट्स बहुत लाभकारी फल होते हैं जो विभिन्न पोषण तत्वों से भरपूर होते हैं। इन फलों में फाइबर, विटामिन सी, विटामिन ए, बी कॉम्प्लेक्स और अन्य महत्वपूर्ण पोषण तत्व होते हैं।
  • बीमारियों का इलाज: ड्रैगन फ्रूट अनेक बीमारियों के इलाज में बहुत उपयोग होते हैं। इनमें एंटी ओक्सिडेंट गुण जैसे की बेटाकारोटीन और लाइकोपीन। जो की बहुत बीमारी को कम करने में उपयोगी होता है।
  • स्वस्थ और उत्तम विकास: इसकी खेती करने से स्वस्थ और उत्तम विकास वाले पौधे प्राप्त होते हैं। यह फल अपनी आँखों के साथ-साथ आपकी त्वचा, बाल और नाखूनों को भी स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।

ड्रैगन फ्रूट्स की खेती: समस्याएं और उनके समाधान

रोग और कीटाणु संक्रमण: ड्रैगन फ्रूट्स की खेती में कुछ बीमारिय और कीटाणु संक्रमण होते हैं, जैसे कि रूट रोट, फलों पर सफेद छटा, फलों पर फंगल संक्रमण आदि। इससे फसल की मात्रा और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

इन समस्याओं का समाधान निम्नलिखित उपायों से किया जा सकता है:

  • फसल के लिए उचित जमीन का चयन: ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए उचित जमीन का चयन करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इन फलों की खेती के लिए जलवायु, मिट्टी और जल की मात्रा को ध्यान में रखते हुए ही जमीन का चयन करना चाहिए।
  • खेतों का साफ-सफाई करना: ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के लिए मुख्यतः खेतों की साफ-सफाई करना बहुत जरूरी होता है। खेतों में अधिक गंदगी और फसल के संक्रमण से  समुचित धातुओं की कमी होती है।
  • ताजा पानी का उपयोग करना: ड्रैगन फ्रूट्स की खेती में समय पर ताजा पानी का उपयोग करना बहुत जरूरी होता है।
  • समय पर फसल काटना: ड्रैगन फ्रूट की खेती में फसल काटने का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। इन फलों को सही समय पर काटना चाहिए।
  • कीटाणु संरक्षण: ड्रैगन फ्रूट की खेती में कीटाणु संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह फसल को संरक्षित रखता है और संक्रमण से बचाता है।
  • खाद और उर्वरकों का उपयोग करना: ड्रैगन फ्रूट की खेती में उचित खाद और उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। क्योंकि यह पौधों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार पोषण प्रदान करता है।
  • स्थानांतरण करना: ड्रैगन फ्रूट की खेती में स्थानांतरण करना एक और विकल्प हो सकता है। स्थानांतरण से पौधे को उचित जमीन व पानी की मात्रा मिल सकती है, जो कि फसल की उत्पादकता में सुधार कर सकता है।

ड्रैगन फ्रूट खाने का तरीका – How to Eat Dragon Fruit in Hindi

ड्रैगन फ्रूट कैसे खाएं इस बारे में बात की जाए, तो आपको बता दे इसके सेवन के कई तरीके हैं-

  • ड्रैगन फ्रूट्स को आप सीधे काटकर खा सकता है।
  • बहुत लोग ड्रैगन फ्रूट्स को ठंडा करके भी खाते है।
  • ड्रैगन फ्रूट्स का उपयोग आप फ्रूट चाट या सलाद के रूप में भी किया जा सकता है।
  • इसका मुरब्बा, कैंडी या जेली  तथा  शेक बनाकर भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

ड्रैगन फ्रूट खाने की मात्रा

वैसे एक बार में 500 ग्राम (एक मध्यम आकार का ड्रैगन फ्रूट) तक की मात्रा में इसे खाया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग-अलग होती है, इसलिए इसे खाने से पहले आहार विशेषज्ञ से पूछ लेना सही होगा।

ड्रैगन फ्रूट्स खाने का समय 

वैसे तो आप इसे दिन में किसी समय भी खा सकते है क्योंकि इसको खाने से लम्बे समय तक  भूख नहीं लगती है लेकिन ध्यान रहे कि इसे आप खाना खाने के आधे घंटे पहले या बाद में ना खाए और यदि सुबह नाश्ते में स्वान करते है तो यह आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा, क्योंकि इससे पाचन क्रिया अच्छी होती है, इसके साथ ही साथ आप दिन भर उर्जावान महसूस करेगे इसके अलावा ठण्ड में इसका स्वान रात में ना करे क्योंकि इसका तासीर ठंडा होता है तो आपको सर्दी या जुखाम जैसे समस्या हो सकती है

समापन

अंत में, ड्रैगन फ्रूट्स की खेती एक लाभदायक व्यवसाय हो सकती है, जो की बहुत सारे फायदे प्रदान कर सकता है। अगर इसे सही तरीके से उचित तकनीकों का उपयोग करके किया जाए, तो इससे किसानों की आय बढ़ सकती है, और किसानो यह एक नया बाजार भी बना सकता है। इसके साथ ही, यह एक स्वस्थ और पौष्टिक फ्रूट्स की आपूर्ति भी प्रदान करता है, जो स्वस्थ जीवन जीने में मददगार साबित हो सकता है।

अतः ड्रैगन फ्रूट्स की खेती के बारे में सही जानकारी होना बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि आप इस फसल की खेती के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको इसका परिचय तथा उचित तकनीकों का उपयोग सीखना होगा। जिससे की आप अपनी खेती को आसन और लाभदायक व्यवसाय के साथ सफल बना सकते हैं, और अपनी आय को बढ़ा सकते हैं।

यदि आप इस फसल की खेती के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो हमारे इस ब्लॉग में आपको जानकारी दी जा रही है ,इसे पढ़कर, आप जानकारी ले सकते हैं कि कैसे इस फसल की खेती से आप अपनी खेती को अधिक लाभप्रद बना सकते हैं। यदि आप इस फसल की खेती को शुरू करने की सोच रहे हैं तो उम्मीद है कि इस लेख ने आपको इस फसल की खेती के बारे में अधिक जानकारी प्रदान की होगी। अगर आप इस लेख से जुड़े किसी भी प्रश्न या सुझाव हैं, तो कृपया हमें कमेंट बॉक्स में लिखें। हमें आपसे संपर्क करने में खुशी होगी।

अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न -ड्रैगन फ्रूट के पौधे कैसे लगाएं?

उतर-ड्रैगन फ्रूट के पौधों को लगाने का तरीका
ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सपोर्ट की आवश्यकता होती है, जिसके लिए खेतों मे किसानों को पोल लगाने पड़ते है।
इसके लिए सीमेंट कंक्रीट के 7.5 फीट लम्बे और 6 इंच के चौकोर आकार के खम्भे होने चाहिए, जिन्हें हमे भूमि में 1.5 से 2 फिट पर अच्छे से दबाना होगा।
ड्रैगन फ्रूट्स के खेती के एक हेक्टेयर में 1111 खम्भों का उपयोग किया जा सकता है।
मुख्यतः इन पिलर को 2.5 x 2.5 मीटर की दूरी पर खेत में लगाना चाहिए।
इन खम्भों के ऊपर मुख्य रूप से 2 फुट व्यास की एक रिंग लगाईं जाती है।
इसमें पौधे से पौधे तथा कतार से कतार की बीच की दूरी 8 से 8 फिट तथा 12 से 12 फिट होनी चाहिए।
मुख्य रूप से एक पोल के चारों और 4 पौधे लगाएं और ऊपर की और दिशा में बांध दें।
इन खम्भों के सहारे आप 4500 पौधे लगा सकते है।
रोपण के तुरंत बाद ही इन पौधों को खम्भे से बाँध देना चाहिए।

प्रश्न-ड्रैगन फ्रूट के पौधे कहाँ मिलेंगे?

उतर-  ड्रैगन फ्रूट्स के पौधे की बात करे तो ये आपको आपके पास के नर्सरी , ऑनलाइन साईट या तो ऐसे जगह से ले सकते है, जहा इसकी खेती ज्यादा होती है। जैसे की गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक तथा अब तो इसकी खेती बिहार में भी की जा रही है।

प्रश्न-ड्रैगन फ्रूट की खेती कब की जाती है?

उतर-ड्रैगन फ्रूट्स की खेती कम वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाती है। आप बरसात को छोड़कर किसी भी मौसम में इसके पौधे या बीज का रोपण कर सकते हैं।ड्रैगन फ्रूट्स का बीज लगाने का सही समय की बात करे तो मार्च से जुलाई के बीच में इसके पौधे और बीज लगाने के लिए बेहतर समय होता है। ध्यान रहे बहुत ज्यादा पानी के साथ ही ज्यादा सूर्य के प्रकाश से भी इसकी खेती को बहुत प्रभावित करते है। इसे सूरज की रोशनी से बचाने के लिए छायादार स्थान पर इसकी खेती की जाती है।

प्रश्न-ड्रैगन फ्रूट कैसे उगाए जाते हैं?

उतर- ड्रेगन फ्रूट के बीज या फिर किसी पहले से उगे पौधे की कटिंग का इस्तेमालकर सकते है,बीज या कलम आप इनमे से किसे चुनेगे, ये सब समय के ऊपर निर्भर करता है। अगर आप ड्रेगन फ्रूट को बीजों से उगा रहे हैं, तो पौधे में फल आने में उसे दो साल या और समय लग सकता है। अगर आप पौधे के तने को काटकर लगा रहे हैं, तो इसमें काफी कम टाइम (आपकी कटिंग का साइज कितना बड़ा है, के अनुसार) लगेगा।


प्रश्न-ड्रैगन फ्रूट का पौधा कितने साल तक चलता है?

उतर- ड्रैगन फ्रूट्स  की खासियत यह है, कि एक बार एक पौधा लगाने के बाद 20 से 25 सालों तक वह फल देता है।

प्रश्न-ड्रैगन फ्रूट की खेती कहां होती है?

उतर- ड्रैगन फ्रूट की खेती मुख्यतः थाइलैंड, वियतनाम, इज़रायल और श्रीलंका में बहुत ही लोकप्रिय है। वहां इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

प्रश्न-ड्रैगन फ्रूट का पौधा कितने दिन में फल देता है ?

उतर- कटिंग से ड्रेगन फ्रूट के पौधे को उगाया जाए, तो पौधे पर फल लगने में लगभग 2 से 3 साल का समय लग सकता है  बीज से ड्रैगन फ्रूट प्लांट लगाया है, तो इस पौधे को फल देने में लगभग 7 साल या इससे अधिक समय लग सकता है।

प्रश्न-क्या मैं ड्रैगन फ्रूट रोज खा सकता हूं?

उतर- आपके मन में ये सवाल अकसर आते होगे क्या  ड्रैगनफ्रूट रोज खा सकते है, तो आपके जानकरी के लिए बता दे। जी हां, आप ड्रैगन फ्रूट रोज खा सकते हैं।

प्रश्न-क्या ड्रैगन फ्रूट किडनी के मरीजों के लिए लाभदायक है?

उतर- जी हां, लाल ड्रैगन फ्रूट का उपयोग किडनी (रीनल फंक्शन) को उच्च कार्बोहाइड्रेट्स और उच्च फैट वाली डाइट के प्रभाव से बचाने में मदद कर सकता है। लेकिन किसका मात्रा आप सिमित ही रखे।

प्रश्न-ड्रैगन फ्रूट की तासीर कैसी होती है?

उतर-ड्रैगन फ्रूट की तासीर ठंडी होती है, इसलिए इसे रात में खाने से बचना चाहिए।

प्रश्न-एक दिन में कितना ड्रैगन फ्रूट्स खाया जा सकता है?

उतर- एक दिन आप में लगभग 500 ग्राम की मात्रा में यानी एक मध्यम आकार का ड्रैगन फ्रूट्स खा सकते है।

ड्रैगन फल को हिंदी में क्या कहते हैं?

ड्रैगन फल को हिन्दी में पिताया कहते है।

About sapana

Studied MSc Agriculture from Banaras Hindu University and having more than 2 years of field experience in field of Agriculture.

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