यूपी में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल नुकसान का सर्वे शुरू: किसानों को जल्द राहत देने की तैयारी

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

पकी हुई धान और दलहन की फसलों पर कुदरत की मार, राजस्व विभाग को सही जानकारी देने और 72 घंटे के भीतर बीमा दावा दर्ज कराने की अपील

खेतों में सुनहरी बालियों के साथ कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल अचानक आई आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण जमीन पर बिछ गई है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पिछले चौबीस घंटों के दौरान बदले मौसम ने अन्नदाताओं की महीनों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा से हुए व्यापक नुकसान को देखते हुए राज्य प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रभावित किसानों को त्वरित आर्थिक मदद और मुआवजा मुहैया कराने के मकसद से पूरे प्रदेश में युद्धस्तर पर फसल नुकसान का संयुक्त सर्वे कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी पात्र किसान मुआवजे या राहत राशि से वंचित न रहे, इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों की संयुक्त टीमें मौके पर जाकर स्थलीय मुआयना करेंगी। संकट की इस घड़ी में किसानों को भी सक्रिय रहकर अपनी क्षतिग्रस्त फसल की जानकारी समय पर दर्ज करानी होगी, ताकि तय समय सीमा के भीतर राहत राशि सीधे उनके खातों में भेजी जा सके।

Gemini Generated Image yjnjrlyjnjrlyjnj 1

मुख्य बिंदु एक नजर में

  • आपदा का स्वरूप: बेमौसम तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से फसलों का गिरना व जलभराव।
  • प्रभावित क्षेत्र: उत्तर प्रदेश के तराई, मध्य और पूर्वी अंचल के प्रमुख कृषि क्षेत्र।
  • प्रमुख प्रभावित फसलें: कटाई के लिए तैयार धान, अगेती बोई गई सरसों, आलू और दलहनी फसलें।
  • सरकारी कदम: राजस्व और कृषि विभाग द्वारा नुकसान का स्थलीय गिरदावरी व सर्वेक्षण।
  • बीमा दावा समय-सीमा: ओलावृष्टि या जलभराव की स्थिति में घटना के 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचना देना अनिवार्य।
  • राहत का आधार: राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के मानक और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का व्यक्तिगत आकलन।

कुदरत की दोहरी मार से फसलों की स्थिति गंभीर

अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में जब किसान रबी फसलों की बुवाई की तैयारी और खरीफ की कटाई में व्यस्त थे, तब मौसम के इस अचानक उलटफेर ने भारी तबाही मचाई है। खेतों में कटी पड़ी धान की फसल में पानी भर जाने से बालियों में दाने अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं तेज हवाओं के साथ गिरे ओलों ने खड़ी फसलों की बालियों को झाड़ दिया है।

विशेष रूप से उन किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है जिन्होंने हाल ही में आलू की बुवाई की थी या अगेती सरसों लगाई थी। खेतों में पानी भर जाने से बीजों के सड़ने की आशंका बढ़ गई है, जिससे किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। इस अतिरिक्त लागत ने छोटे और सीमांत किसानों की कमर तोड़ दी है।

राजस्व विभाग और बीमा टीमें कैसे करेंगी सर्वे

राज्य सरकार के निर्देशों के तहत प्रत्येक तहसील में विशेष निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया जा रहा है। राजस्व विभाग के लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी और कृषि विभाग के तकनीकी सहायक संयुक्त रूप से हर गांव में जाकर खेतों का निरीक्षण करेंगे।

इस प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग के साथ-साथ पारंपरिक गिरदावरी का सहारा लिया जाएगा। जिन किसानों के पास फसल बीमा है, उनके खेतों का पंचनामा स्थानीय अधिकारियों और बीमा प्रतिनिधि की मौजूदगी में बनाया जाएगा। यदि किसी क्षेत्र में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पाया जाता है, तो उसे आपदा राहत नियमों के तहत सहायता सूची में शामिल किया जाएगा।

किसानों पर प्रभाव: छोटे काश्तकारों के लिए बड़ी चुनौती

इस प्राकृतिक मार का सबसे गहरा असर बटाईदारों और सीमांत किसानों पर पड़ा है। अधिकांश छोटे किसानों ने खाद, बीज और डीजल के लिए स्थानीय स्तर पर कर्ज लिया था। फसल तैयार थी और मंडी ले जाने की योजना बन रही थी, लेकिन जलभराव ने पूरी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर राहत न मिलने की स्थिति में किसानों के सामने अगली रबी फसल यानी गेहूं की बुवाई के लिए आवश्यक इनपुट जुटाना बेहद कठिन हो जाएगा। यही कारण है कि प्रशासन इस बार कागजी औपचारिकताओं को घटाकर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए सीधे बैंक खातों में धनराशि भेजने पर जोर दे रहा है।

अब प्रभावित किसान क्या करें: चरणबद्ध मार्गदर्शिका

  1. क्षति का विवरण तुरंत दर्ज कराएं: अपने क्षेत्र के क्षेत्रीय लेखपाल, कृषि प्राविधिक सहायक या ग्राम प्रधान से तत्काल संपर्क करें और अपने खेत में हुए नुकसान की प्रविष्टि सरकारी रजिस्टर में दर्ज कराएं।
  2. 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को बताएं: यदि आपकी फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम कटा है, तो ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश की घटना के ठीक 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके शिकायत संख्या (Docket Number) अवश्य प्राप्त करें।
  3. क्रॉप इंश्योरेंस ऐप का उपयोग करें: अपने स्मार्टफोन में भारत सरकार के ‘क्रॉप इंश्योरेंस’ (Crop Insurance App) ऐप को डाउनलोड करें। इसके जरिए अपने क्षतिग्रस्त खेत की जीपीएस लोकेशन वाली फोटो और वीडियो सीधे पोर्टल पर अपलोड करें।
  4. आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें: अपनी जमीन की खतौनी, बैंक पासबुक की प्रति, आधार कार्ड और यदि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बना है तो उसकी छायाप्रति सुरक्षित रख लें ताकि सर्वे टीम के आते ही कागजात दिखाए जा सकें।
  5. खेत से जल निकासी का प्रयास करें: यदि खेत में पानी जमा है और दाने डूब रहे हैं, तो तुरंत नाली बनाकर पानी को बाहर निकालें ताकि फफूंद लगने और अंकुरण की प्रक्रिया को रोका जा सके।
  6. अधिकारिक रसीद अवश्य लें: बीमा कंपनी के प्रतिनिधि या राजस्व कर्मी को दी गई किसी भी लिखित अर्जी की हस्ताक्षरित रिसीविंग अपने पास रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखें।

पहले के नियम और इस बार का अंतर

पूर्व में फसलों के नुकसान का आकलन केवल ब्लॉक या न्याय पंचायत स्तर पर समग्र उपज के आधार पर किया जाता था। इससे यदि किसी गांव विशेष या एक ही किसान के खेत में ओलावृष्टि से 100% नुकसान होता था, तब भी उसे व्यक्तिगत मुआवजा नहीं मिल पाता था।

लेकिन संशोधित नियमों के तहत ओलावृष्टि, भूस्खलन और बेमौसम जलभराव को ‘स्थानीयकृत आपदा’ (Localized Calamity) माना गया है। इसका अर्थ यह है कि अब खेत-दर-खेत व्यक्तिगत क्षति का आकलन कर सीधे संबंधित किसान को भरपाई की जाएगी।

दलालों और फर्जी कॉल से सावधान रहें

आपदा के समय अक्सर ठग सक्रिय हो जाते हैं। किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति को मुआवजा दिलाने के नाम पर नकद पैसे न दें। किसी भी व्यक्ति के साथ अपने बैंक खाते का ओटीपी या संवेदनशील पिन साझा न करें। सरकारी योजनाओं का मुआवजा केवल आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे भेजा जाता है, इसके लिए किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होती।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

About sapana

Studied MSc Agriculture from Banaras Hindu University and having more than 2 years of field experience in field of Agriculture.

Check Also

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों ने उठाई आवाज: मांगें और फायदे

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों ने उठाई आवाज: रसायन मुक्त खेती से आय और सेहत दोनों सुधरने का दावा

WhatsApp Group Join Now Telegram Group Join Now Instagram Group Join Now देशभर के ग्रामीण …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *