मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti): एक लाभदायक विकल्प (Mushroom Ki Kheti: A Profitable Option) 🍄

Table of Contents

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti)

मशरूम की खेती हिंदी में जानकारी के लिए इसे Google Scholar, ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), KVK (कृषि विज्ञान केंद्र), विश्वविद्यालयों के कृषि विभाग, कृषि पत्रिकाओं के द्वारा किये गए शोध पत्रों को ध्यान में रखकर लिखा गया है।

mushroom ki kheti
mushroom ki kheti | Credit: Freepik.com

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) का परिचय

भारत में मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) (Mushroom Ki Kheti) का इतिहास और वर्तमान स्थिति

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) का आरंभ 1961 में डॉ. सी. वी. सुब्रमण्यम द्वारा किया गया था। वर्तमान में भारत में 1.25 लाख टन से अधिक मशरूम का उत्पादन होता है, जिसमें से 85% बटन मशरूम की खेती की जाती है। भारत में मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए उपलब्ध किस्में हैं:

बटन मशरूम, ओयेस्टर मशरूम, मिल्की मशरूम, पद्यास्त्र मशरूम, शीताके मशरूम, रेशी मशरूम, आदि।

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मशरूम की किस्में (खाने योग्य, औषधीय)

mushroom
mushroom | Credit: Freepik.com

खाने योग्य मशरूम: 

इनमें उच्च प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं: बटन मशरूम, ओयेस्टर मशरूम, मिल्की मशरूम, शीताके मशरूम, आदि।

औषधीय मशरूम: 

इनमें विशेष रूप से औषधीय गुण होते हैं, जो विभिन्न रोगों के उपचार में कारगर होते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं: रेशी मशरूम, कॉर्डिसेप्स मशरूम, मेटाके मशरूम, आदि।

मशरूम की खेती के लाभ (Benefits of Mushroom Farming)

मशरूम की खेती से लाभ (Benefits of Mushroom Farming) की बात करे तो इसे कराने के लिए कम भूमि, पानी और पूंजी की आवश्यकता होती है। मशरूम की खेती के लाभ (Benefits of Mushroom Farming) निम्नलिखित है:

  • मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए आपको ज्यादा भूमि की जरूरत नहीं होती है, आप एक छोटे से कमरे में भी मशरूम उगा सकते हैं।
  • मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए आपको ज्यादा पानी की भी जरूरत नहीं होती है, आप खाद को एक बार गीला करके रख सकते हैं, और फिर आर्द्रता को बनाए रखने के लिए छिड़काव कर सकते हैं।
  • मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए आपको ज्यादा पूंजी की भी जरूरत नहीं होती है, आप आसानी से बीज और खाद को सस्ते में खरीद सकते हैं, या फिर अपने घर के कचरे से भी खाद बना सकते हैं।

उच्च पैदावार और त्वरित आय चक्र

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) से आप उच्च पैदावार प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि मशरूम जल्दी बढ़ते हैं, और एक ही खाद से कई बार फलन होता है। मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) से आप त्वरित आय चक्र भी प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) का समय केवल 2-3 महीने होता है, और आप अपने मशरूम को तुरंत बेच सकते हैं।

पोषण सुरक्षा में योगदान

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) से आप पोषण सुरक्षा में भी योगदान कर सकते हैं, क्योंकि मशरूम में उच्च प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो आपके शरीर को स्वस्थ रखते हैं। मशरूम को आप अपने आहार में विभिन्न तरह से शामिल कर सकते हैं, जैसे की सूप, सलाद, करी, पराठा, पिकल, आदि।

रोजगार सृजन, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) से आप रोजगार सृजन में भी योगदान कर सकते हैं, क्योंकि मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए आपको ज्यादा श्रमिकों की जरूरत नहीं होती है, और आप अपने परिवार के सदस्यों को भी रोजगार दे सकते हैं।

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) से विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन में योगदान किया जा सकता हैं, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोगों के पास उचित रोजगार की कमी होती है, और मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) से वे अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

शून्य खेती और जैविक खेती (Jaivik Keti) के अनुरूप

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) शून्य खेती और जैविक खेती (Jaivik Keti) के अनुरूप ही होता हैं, क्योंकि मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में आपको किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग नहीं करना पड़ता है, और आप अपने घर के कचरे जैसे अनाज के छिलके, घास, पत्ते, आदि को खाद के रूप में उपयोग कर सकते हैं। 

अगर आपको घर के कचरे से खाद बनाने की जानकारी चाहिए तो आप हमारे लेख नाडेप (Nadep) को पढ़ सकते है। 

कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देना

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) से आप कृषि विविधीकरण को भी बढ़ावा दे सकते हैं, क्योंकि मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) को आप अपनी मौजूदा फसलों के साथ जोड़ सकते हैं, और अपनी फसल उत्पादन के साथ-साथ अपनी आय को और बढ़ा सकते हैं।

मशरूम की खेती के तरीके (Mushroom Ki Kheti Kaise Hoti Hai)

मशरूम की खेती कैसे करें (Mushroom Ki Kheti Kaise Hoti Hai या Mushroom Ki Kheti Kaise Karen) की बात करे तो इसे कराने के निम्नलिखित तरीके है:

मशरूम की खुली खेती (Open Cultivation)

इस तरीके में आप मशरूम को खुले में, जैसे की बगीचे, छत, बालकनी, आदि में उगा सकते हैं। इस तरीके में आपको तापमान और आर्द्रता का ध्यान रखना होगा, और अपने मशरूम को सूरज की तेज धूप और बारिश से बचाना होगा। इस तरीके में आपको अपने मशरूम को नियमित रूप से पानी देना होगा, और उन्हें कीट और रोगों से बचाने के लिए उपाय करना होगा।

मशरूम की नियंत्रित वातावरण खेती (Controlled Environment Cultivation)

इस तरीके में आप मशरूम को एक नियंत्रित वातावरण में, जैसे की एक कमरे, गोदाम, टनल, आदि में उगा सकते हैं। इस तरीके में आपको तापमान और आर्द्रता को आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं, और अपने मशरूम को सूरज की तेज धूप और बारिश से बचा सकते हैं। इस तरीके में आपको अपने मशरूम को कम पानी देना होगा, और उन्हें कीट और रोगों से बचाने के लिए आसानी से उपाय कर सकते हैं।

घर पर मशरूम उगाना (Home Mushroom Cultivation)

मशरूम की खेती कैसे करें घर पर की बात करे तो आप मशरूम को अपने घर पर, जैसे की एक बॉक्स, बोतल, बाल्टी, आदि में उगा सकते हैं। इस तरीके में आपको तापमान और आर्द्रता का ध्यान रखना होता है, और अपने मशरूम को सूरज की धूप और बारिश से बचाना होता है। इस तरीके में आपको अपने मशरूम को नियमित रूप से पानी देना होता है, और उन्हें कीट और रोगों से बचाने के लिए उपाय करना होता है।

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के चरण

उपयुक्त किस्म का चयन

जलवायु, बाजार, रुचि और उपलब्धता के अनुसार उपयुक्त मशरूम की किस्म का चयन करना होगा। किस्म के लिए उचित बीज (स्पॉन) का चयन करना होगा, जो आपको विश्वसनीय स्रोतों से खरीदना होगा। बीज को तैयार करने के लिए उचित विधि का पालन करना होगा, जैसे की बीज को भिगोना, उबालना, ठंडा करना, आदि। 

मशरूम की खेती के लिए बीज कहाँ से खरीदेंगे?

वैसे तो आप कहीं से बीज खरीद सकते है परंतु मेरी सलाह यही है कि आप किसी विश्वशनीय जगह से ही ले या फिर किसी सरकारी संस्थान से ले जिनमे से कुछ प्रमुख संस्थान के नाम निम्न है:

  • क्षेत्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला, सीएसआईआर, श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर)
  • पादप रोग विज्ञान विभाग, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार (हरियाणा)
  • जवाहर लाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्य प्रदेश)
  • खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश)
  • डॉ यशवंत सिंह परमार बागवानी व वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश)
  • बागवानी निदेशालय, मशरूम स्पॉन प्रयोगशाला, कोहिमा (नागालैंड)
  • विज्ञान समिति, उदयपुर (राजस्थान)
  • कृषि विभाग, इम्फाल (मणिपुर)

अगर आप किसी भी ऐसा नजदीकी जगह आपके आसपास नहीं है तो आप बीज खरीदने के लिए ऑनलाइन का भी सहारा ले सकते है परंतु ध्यान रहे की जिस भी ऑनलाइन  जगह से बीज मंगाये वो बीज की उत्तम गुणवत्ता की गारंटी दे। 

खाद तैयार करना (कम्पोस्टिंग) 

मशरूम के लिए उपयुक्त खाद तैयार करना होगा, जो मशरूम को पोषण और वृद्धि के लिए आवश्यक है। खाद के लिए उपयुक्त सामग्री का चयन करना होगा, जैसे की अनाज के छिलके, घास, पत्ते, गोबर, आदि। खाद को कम्पोस्टिंग के लिए उचित विधि का पालन करना होगा, जैसे की खाद को एकत्र करना, गीला करना, हवा देना, उलटना, आदि।

मशरूम के लिए उपयुक्त खाद तैयार करने के लिए आपको उच्च गुणवत्ता वाले चावल और मक्के के नये भूसे ले क्योंकि ये गेंहू के भूसे से अच्छे होते है। ये भी ध्यान रखे कि ये भूसे बारिश में भीगे हुआ न हो। धान की पराली अथवा मक्के के भूसे के स्थान पर सरसों का भूसा भी प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन सरसों के भूसे के साथ मुर्गी खाद का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

अब 100 लीटर पानी में 100 ग्राम फार्मलीन एवं 10 ग्राम बेवस्टीन मिला ले। इसके बाद इसमें 10 किलो ग्राम चावल और मक्के का भूसा डाल दे। 

खाद व्यवस्थापन (बेगिंग)

आपको अपने खाद को बेगिंग के लिए उचित विधि का पालन करना होगा, जो मशरूम को एक समान वातावरण प्रदान करता है। इसके लिए आपको भिंगोये हुए भूसे के अतिरिक्त नमी को सुखा ले।  आपको अपने खाद को उचित आकार और प्रकार के बैग में भरना होगा, जैसे की पॉलीथीन बैग, पानी रोकने वाले बैग, आदि। आपको अपने बैग में उचित रूप से छेद करना होगा, जो मशरूम को हवा और आर्द्रता प्रदान करते हैं।

स्पॉनिंग (बीज बोना)

आपको अपने बैग में उपयुक्त मात्रा में बीज (स्पॉन) बोना होगा, जो मशरूम को विकसित होने के लिए आवश्यक है। इसके लिए आप एक बैग में खाद और बीज को लेयर वाइज भर सकते है। 

शुरुवात में आपको अपने बैग को एक अंधेरे और शुष्क स्थान पर रखना होगा, जहाँ हवा का प्रवेश न हो सके तथा वह का तापमान और आर्द्रता नियंत्रित हो। ऐसा न करने पर नमी से बीज खराब हो सकते है।

आपको अपने बैग को नियमित रूप से जांचना होगा, और एक बार मशरूम में क्यूब निकल आने पर इसे नियमित रूप से हवा की जरूरत पड़ती है (लगभग 6 से 8 घंटे )। इसके साथ ही यदि कोई संक्रमण या सूखापन हो, तो उसे दूर करने का उपाय करना चाहिए।

फलन (Fruiting)

आपको अपने बैग को एक रोशनी और गीले स्थान पर ले जाना होगा, जहाँ मशरूम को फलने के लिए आवश्यक तापमान और आर्द्रता मिल सके। बैग को एक ऐसे स्थान पर रखना होगा, जहाँ मशरूम को सीधी धूप न लगे, लेकिन पर्याप्त रोशनी और हवा मिले। आपको अपने बैग को नियमित रूप से पानी देना होगा, और उन्हें धूल, कीड़े और रोगों से बचाने के लिए उपाय करना होगा। इससे मशरूम लगभग 30 से 50 में तैयार हो जाता है। 

कटाई और पैकिंग

मशरूम को लगभग 30 से 50 में पूरी तरह से विकसित हो जाता है इसके बाद आप इसकी कटाई कर सकते है। आपको अपने मशरूम को सावधानीपूर्वक कटाई करना चाहिए, और उन्हें धोकर और सुखाकर उचित प्रकार के डिब्बे, थैले, आदि में पैक कर ले जिससे उन्हें ताजा और स्वच्छ  रखा जा सके।

विपणन

आप अपने मशरूम को उचित बाजार में बेचे, जहाँ आपको उसका अच्छा मूल्य और ग्राहक मिल सके। इसके लिये आप अपने आस-पास के लोगों, दुकानदारों, होटलों, आदि को प्रचार करके मशरूम के गुण और लाभ बता सकते है, जिससे वे प्रोत्साहित होकर आपसे माल खरीद भी सके और आगे अपने ग्राहकों को बेच भी सके।

अच्छा मुनाफा कमाने के लिए अपने मशरूम को नियमित रूप से उपलब्ध कराना होगा, और अपने ग्राहकों के साथ अच्छा संबंध बनाये रखना होगा।

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में चुनौतियां और समाधान

तापमान और आर्द्रता नियंत्रण

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में तापमान और आर्द्रता का नियंत्रण करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि मशरूम को विकसित होने के लिए एक निश्चित सीमा के भीतर तापमान और आर्द्रता की आवश्यकता होती है।

इस चुनौती का समाधान यह है कि आप अपने मशरूम को एक नियंत्रित वातावरण में उगाएं, जहाँ आप तापमान और आर्द्रता को आसानी से नियंत्रित कर सकें। आप अपने मशरूम को एक कमरे, गोदाम, टनल, आदि में उगा सकते हैं, और उन्हें फैन, हीटर, ह्यूमिडिफायर, आदि के साथ रख सकते हैं।

कीट एवं रोग नियंत्रण

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में कीट और रोगों का प्रकोप होना एक आम बात है, जो मशरूम की वृद्धि और गुणवत्ता को प्रभावित करता है। इस चुनौती का समाधान यह है कि आप अपने मशरूम को स्वच्छ और संक्रमण-मुक्त रखें, और उन्हें नियमित रूप से जांचें। आप अपने बीज, खाद, बैग, आदि को अच्छी तरह से साफ करें, और उन्हें बाहरी स्रोतों से अलग रखें। आप अपने मशरूम को कीट और रोगों से बचाने के लिए जैविक उपाय करें, जैसे की नीम का तेल, लहसुन का रस, आदि।

बाजार पहुंच और मूल्य प्राप्ति

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में बाजार पहुंच और मूल्य प्राप्ति करना भी एक चुनौती है, क्योंकि मशरूम एक नाजुक और ताजा उत्पाद है, जो जल्दी खराब हो जाता है। इस चुनौती का उपाय यह है कि आप अपने मशरूम को अच्छे से पैकेजिंग करें, और उन्हें तुरंत बाजार में बेच दे।

मशरूम को अपने आस-पास के बाजार में बेच सकते हैं, या फिर अपने मशरूम को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लिस्ट कर के बेच सकते हैं। अपने मशरूम को उचित मूल्य पर बेचने के लिए अपने ग्राहकों को मशरूम के गुण और लाभ के बारे में बताएं, और उनके साथ अच्छा संबंध बनाएं।

सफल मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए टिप्स

गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद का इस्तेमाल

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज और खाद का इस्तेमाल करना चाहिए, जो आपको उच्च पैदावार और गुणवत्ता प्रदान करेंगे। इसीलिए बीज और खाद को विश्वसनीय और प्रमाणित स्रोतों से ही खरीदना चाहिए, और उनकी गुणवत्ता को भी जांचना चाहिए।

स्वच्छता पर ध्यान देना

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि स्वच्छता से मशरूम की वृद्धि और गुणवत्ता में सुधार होता है। मशरूम के बीज, बैग, उपकरण, आदि को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए, और उन्हें अन्य स्रोतों से अलग रखना चाहिए। मशरूम को भी अच्छी तरह से साफ और ताजा रखना चाहिए, और उन्हें धोकर और सुखाकर पैक करना चाहिए।

तापमान और आर्द्रता प्रबंधन करना

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में तापमान और आर्द्रता का प्रबंधन करना चाहिए, क्योंकि तापमान और आर्द्रता के अनुकूल होने से मशरूम की वृद्धि और फलन में वृद्धि होती है। मशरूम को एक ऐसे स्थान पर रखना चाहिए, जहाँ तापमान और आर्द्रता को आसानी से नियंत्रित किया जा सके, जैसे की एक नियंत्रित वातावरण वाले स्थान पर। इसको नियमित रूप से पानी देना चाहिए, और उन्हें पानी का छिड़काव भी करना चाहिए, जिससे उनकी आर्द्रता बनी रहे।

नियमित निगरानी और देखभाल

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में नियमित निगरानी और देखभाल करना चाहिए, क्योंकि निगरानी और देखभाल से मशरूम की वृद्धि और गुणवत्ता में सुधार होता है। अपने मशरूम को नियमित रूप से जांचना चाहिए, और यदि कोई संक्रमण, कीट, रोग, सूखापन, आदि हो, तो उसे दूर करना चाहिए। मशरूम की कटाई उचित समय पर करना चाहिए, और उन्हें तुरंत पैक और बेचना चाहिए।

बाजार की मांग के अनुसार खेती करना

आपको अपनी मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) में बाजार की मांग के अनुसार खेती करना चाहिए, क्योंकि बाजार की मांग से आपको अच्छा मूल्य और ग्राहक मिल सकते हैं। आपको अपने मशरूम की किस्म, मात्रा, गुणवत्ता, आदि को बाजार की मांग के अनुरूप रखना चाहिए, और उन्हें उचित तरीके से प्रचार करना चाहिए। अपने मशरूम को उचित बाजार में बेचना चाहिए, जहाँ आपको अच्छा मूल्य और ग्राहक मिल सके।

सरकारी सहायता और संसाधन

राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणाली (NARS)

यह एक सरकारी संगठन है, जो कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करता है। इसमें ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), SAU (कृषि विश्वविद्यालय), KVK (कृषि विज्ञान केंद्र), आदि शामिल हैं। यह आपको मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए शोध, विकास, प्रौद्योगिकी, बीज, खाद, उपकरण, प्रशिक्षण, सलाह, आदि प्रदान करता है।

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)

यह एक स्थानीय स्तर का संगठन है, जो कृषि अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करता है। यह आपको मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए व्यावहारिक ज्ञान, कौशल, डेमो, फील्ड विजिट, आदि प्रदान करता है। यह आपको मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए आर्थिक सहायता, बाजार सूचना, आदि भी प्रदान करता है।

राज्य कृषि विभाग

यह एक सरकारी विभाग है, जो कृषि उत्पादन, विपणन, नीति, योजना, आदि के क्षेत्र में काम करता है। यह आपको मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए आर्थिक सहायता, सब्सिडी, बीमा, आदि प्रदान करता है। यह आपको मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) के लिए बाजार सूचना, विनिमय, आदि प्रदान करता है।

निष्कर्ष:

मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) एक लाभकारी और सतत कृषि गतिविधि है, जो किसानों को विभिन्न लाभ प्रदान करती है, जैसे की आय उत्पन्न करना, खाद्य सुरक्षा, अपशिष्ट प्रबंधन, जैविक खेती, और फसल विविधीकरण। हालांकि, मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे की तापमान और आर्द्रता नियंत्रण, कीट और रोग प्रबंधन, बाजार पहुंच और मूल्य प्राप्ति।

इन चुनौतियों को उचित तरीकों, तकनीकों, और प्रथाओं को अपनाकर, और सरकारी सहायता और संसाधनों का लाभ उठाकर, दूर किया जा सकता है। इसके अलावा, मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) को ऑनलाइन पाठ्यक्रमों, पुस्तकों, पत्रिकाओं, अनुभवी किसानों, उद्यमियों, आदि से सीखकर, बेहतर बनाया जा सकता है। मशरूम की खेती (Mushroom Ki Kheti) एक पुरस्कार और आनंददायक उद्यम है, जो किसानों और उपभोक्ताओं की आजीविका और स्वास्थ्य में सुधार करता है। 🍄

About sapana

Studied MSc Agriculture from Banaras Hindu University and having more than 2 years of field experience in field of Agriculture.

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